बिहार में परीक्षा सुधार के लिए बनेगी 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति
पेपर लीक, नकल और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के साथ पारदर्शी व सुरक्षित व्यवस्था की अनुशंसा करेगी समिति
बिहार, 24 अगस्त 2026। बिहार सरकार ने राज्य के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों एवं अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में व्यापक सुधार की अनुशंसा के लिए “परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति” के गठन का निर्णय लिया है।
सरकार की अधिसूचना के अनुसार परीक्षा प्रणाली की समीक्षा कर ऐसी व्यवस्था स्थापित करने के लिए सुधारों की सिफारिश की जाएगी, जो निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीकी-सक्षम, समयबद्ध, योग्यता उन्मुख, सुलभ और विश्वसनीय हो।
परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार पर जोर
अधिसूचना में कहा गया है कि उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के विस्तार, सार्वजनिक रोजगार के लिए प्रतियोगिता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, छात्रों एवं अभिभावकों की आकांक्षाओं तथा अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता के कारण परीक्षा का पारिस्थितिकी तंत्र जटिल हो गया है।
समिति परीक्षा के पूरे चक्र यानी पंजीकरण, प्रश्न-पत्र तैयारी, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, परिणाम, शिकायत निवारण और अभिलेखों के रख-रखाव में सुधार के लिए अनुशंसा करेगी।
पेपर लीक और नकल रोकना प्रमुख उद्देश्य
समिति का उद्देश्य प्रश्न-पत्र लीक, छद्म परीक्षार्थी, चोरी एवं सामूहिक नकल, परीक्षा केंद्रों में हेराफेरी, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, परीक्षा डेटा पर अनधिकृत पहुंच, परिणाम में हेराफेरी और परीक्षा कदाचार को रोकने के उपाय सुझाना होगा।
इसके अलावा परीक्षा के समयबद्ध संचालन और परिणामों की समय पर घोषणा के साथ परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता एवं जवाबदेही स्थापित करने पर भी समिति विचार करेगी।
डिजिटल तकनीक और AI के उपयोग की भी होगी समीक्षा
समिति मानवीय पर्यवेक्षण और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डिजिटल प्रौद्योगिकी, डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा उपकरणों के उचित उपयोग की संभावनाओं की भी समीक्षा करेगी।
समिति स्वतंत्र गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षाओं के ऑडिट की प्रणाली विकसित करने की अनुशंसा करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि परीक्षा सुधारों से ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर, सामाजिक रूप से वंचित या डिजिटल रूप से कम जुड़े छात्रों को नुकसान न हो।
इन परीक्षाओं की समीक्षा के दायरे में होंगी
समिति आवश्यकतानुसार बिहार में आयोजित होने वाली विभिन्न श्रेणी की परीक्षाओं की जांच कर अनुशंसा कर सकती है।
- माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षाएं
- विश्वविद्यालय की परीक्षाएं
- व्यावसायिक एवं तकनीकी परीक्षाएं
- प्रवेश एवं पात्रता परीक्षाएं
- भर्ती एवं प्रतियोगिता परीक्षाएं
समिति संवैधानिक एवं वैधानिक परीक्षा तथा भर्ती निकायों की वैधानिक स्वायत्तता का सम्मान करेगी और समन्वय एवं साझा सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए संस्थागत तंत्र की सिफारिश करेगी।
राज्य परीक्षा कैलेंडर की हो सकती है सिफारिश
समिति परीक्षाओं, मूल्यांकन और परिणामों की घोषणा में होने वाली देरी के कारणों की समीक्षा करेगी। जहां तक संभव हो, एक राज्य परीक्षा कैलेंडर की सिफारिश की जाएगी।
इसमें विज्ञापन, आवेदन, प्रवेश पत्र जारी करने, परीक्षा, प्रोविजनल उत्तर कुंजी के प्रकाशन, आपत्ति दर्ज करने, अंतिम उत्तर कुंजी के प्रकाशन, मूल्यांकन, परिणाम प्रकाशन, जांच/पैनल मूल्यांकन एवं अनुशंसा भेजने के लिए अधिकतम समय-सीमा निर्धारित करने पर विचार किया जाएगा।
प्रश्न-पत्र तैयार करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा
समिति प्रश्न-पत्र निर्माण की व्यापक समीक्षा करेगी। इसमें बहु-स्तरीय प्रश्न-पत्र सेटिंग, मॉडरेशन, प्रशिक्षित एवं सूचीबद्ध पेपर सेटर का उपयोग तथा कठिनाई स्तर के मानकीकरण जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रणाली की अनुशंसा की जाएगी।
परीक्षा सुरक्षा का होगा व्यापक ऑडिट
परीक्षा सुरक्षा एवं पेपर लीक की रोकथाम के लिए प्रश्न-पत्र सेटिंग, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, वितरण, डिजिटल ट्रांसमिशन और एक्सेस कंट्रोल सहित पूरी परीक्षा प्रक्रिया का व्यापक सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा।
परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, वीक्षक, उत्तर पुस्तिकाओं का संकलन, परिवहन, सुरक्षित भंडारण, स्कैनिंग/डिजिटलीकरण, मूल्यांकन और परिणाम प्रोसेसिंग की भी समीक्षा की जाएगी।
समिति परीक्षा सामग्रियों की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग, छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग, एन्क्रिप्टेड ट्रांसमिशन, मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैगिंग एवं जियो-फेंसिंग, साइबर सुरक्षा ऑडिट, सीसीटीवी और सुरक्षित कमांड सेंटर की व्यवहार्यता की भी जांच करेगी।
📌 विशेषज्ञ समिति के प्रमुख कार्य
- परीक्षा प्रणाली की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा।
- पेपर लीक और परीक्षा कदाचार रोकने के उपायों की अनुशंसा।
- परीक्षाओं एवं परिणामों के लिए समयबद्ध व्यवस्था पर सुझाव।
- प्रश्न-पत्र निर्माण एवं मॉडरेशन व्यवस्था में सुधार।
- बायोमेट्रिक, सीसीटीवी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल तकनीक के उपयोग की समीक्षा।
- परीक्षा सामग्री के लिए स्पष्ट Chain of Custody Protocol की अनुशंसा।
- कानूनी एवं नियामक ढांचे में आवश्यक बदलावों पर सुझाव।
5 सदस्यीय समिति का होगा गठन
अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार द्वारा 05 सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। समिति की अध्यक्षता माननीय उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, माननीय उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश अथवा माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।
अध्यक्ष के मनोनयन के लिए आवश्यकतानुसार माननीय उच्चतम न्यायालय या माननीय उच्च न्यायालय से अनुरोध किया जाएगा।
तीन महीने के भीतर देनी होगी सिफारिश
अधिसूचना में कहा गया है कि समिति अपने गठन की तिथि से तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिश देगी। समिति आवश्यकता के अनुसार आयोगों, विश्वविद्यालयों, संस्थानों, जिला प्रशासन, राज्य भर्ती एजेंसियों, विषय विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थानों, प्रौद्योगिकीविदों एवं अन्य लोगों से परामर्श कर सकती है।
समिति में किए गए सभी परामर्श एवं पत्राचार को गोपनीय रखा जाएगा।
अधिसूचना: बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से यह अधिसूचना 23 अगस्त 2026 को जारी की गई है। अधिसूचना बिहार के राज्यपाल के आदेश से सरकार के सचिव मो. सोहैल के हस्ताक्षर से जारी की गई।






