भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – मार्क्सवादी (माकपा) भी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए तैयार है. पार्टी की पोलित ब्यूरो की नयी दिल्ली में बैठक हुई. इसमें पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026, केंद्र सरकार की नीतियों और देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों पर अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट किया. पार्टी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने की जनता से अपील की है. साथ ही 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली का भी ऐलान किया.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ दिल्ली में रैली
माकपा ने घोषणा की है कि 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में श्रम संहिताओं, मनरेगा को कमजोर करने, विकसित भारत जी रामजी कानून, बिजली संशोधन विधेयक, बीज विधेयक और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ एक विशाल जनसभा होगी. इसकी तैयारी के तहत उत्तर भारत के सभी राज्यों में जन आक्रोश जत्थे निकाले जायेंगे. इन जत्थों में पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्य शामिल लेंगे. माकपा का आरोप है कि भाजपा नीत केंद्र सरकार कई लेवल पर मजदूरों, किसानों और गरीब तबकों के अधिकारों पर हमले कर रही है.
तृणमूल के शासन की माकपा ने की आलोचना
पार्टी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का शासन सत्तावादी, महिला विरोधी और गरीब विरोधी है. पार्टी ने मतदाताओं से अपील की कि वे वाम मोर्चा के पक्ष में मतदान कर तृणमूल और भाजपा दोनों को पराजित करें. माकपा ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में सांप्रदायिक जहर फैलाने और धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रही है. कहा कि मुस्लिम कट्टरपंथी और सांप्रदायिक ताकतें भी भाजपा विरोध के नाम पर एकजुट होने की कोशिश कर रही हैं. इससे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ेगा और लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को नुकसान होगा.
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धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही तृणमूल कांग्रेस
पोलित ब्यूरो ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस सत्ता में बने रहने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण को परोक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है. माकपा ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया को भी विवादास्पद करार दिया. कहा कि इसे बहुत कम समय में लागू किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी ने कहा कि प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति इन आरोपों की पुष्टि करता है.
अल्पसंख्यकों, दलितों और महिलाओं पर हमले पर जतायी चिंता
पार्टी ने अल्पसंख्यकों, दलितों और महिलाओं पर बढ़ते हमलों पर चिंता जतायी. विभिन्न राज्यों में हुई घटनाओं की निंदा की. साथ ही गुजरात सरकार द्वारा विवाह के लिए अभिभावक की सहमति अनिवार्य करने के फैसले को महिला अधिकारों पर हमला बताया. बजट सत्र के संदर्भ में माकपा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है और विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा.
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता देशहित में नहीं
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को देशहित के खिलाफ बतया. कहा कि इससे किसानों और मजदूरों पर विपरीत असर होगा. राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता होगा. विदेश नीति के मुद्दों पर भी बयान में क्यूबा, ईरान और फिलीस्तीन के समर्थन की बात दोहरायी गयी. अमेरिका की आक्रामक नीतियों की भी आलोचना की गयी.
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