बंगाल चुनाव 2026 : वोट नहीं डाल पायेंगे तृणमूल के पंचायत समिति के कार्यपालक?

बंगाल चुनाव 2026 : वोट नहीं डाल पायेंगे तृणमूल के पंचायत समिति के कार्यपालक?

बर्दवान/पानागढ़, मुकेश तिवारी : पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी अंतिम वोटर लिस्ट के बाद भातार में एक नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है. वोटर लिस्ट से लाखों मतदाताओं के नाम या तो गायब हैं या उनके सामने ‘अंडर एडजुडिकेशन’ लिखा आ रहा है. पूर्व बर्धमान जिले के भातार पंचायत समिति के कार्यपालक सदस्य शफीकुल आलम का नाम भी इसी श्रेणी में डाल दिया गया है.

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भातार विधानसभा क्षेत्र के हरिपुर निवासी हैं शफीकुल

267 भातार विधानसभा क्षेत्र के हरिपुर निवासी शफीकुल आलम पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य और कार्यपालक हैं. शनिवार को जैसे ही उन्होंने नयी वोटर लिस्ट देखी, हैरान रह गये. उनका कहना है कि सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम इस श्रेणी में कैसे चला गया, यह समझ से परे है. उन्होंने मामले की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी है.

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं में बढ़ी बेचैनी

इस घटना के बाद इलाके के तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी बेचैनी बढ़ गयी है. आशंका जतायी जा रही है कि यदि समय पर उनका मामला स्पष्ट नहीं हुआ, तो वे विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान नहीं कर पायेंगे.

न्यायिक अधिकारी कर रहे 60 लाख से अधिक वोटर की जांच

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद करीब 60,06,675 मतदाताओं की पात्रता की न्यायिक अधिकारी दोबारा जांच कर रहे हैं. यह संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 8.5 प्रतिशत है. अंतिम वोटर लिस्ट में इन लोगों के नाम तो हैं, लेकिन उनके सामने ‘अंडर एडजुडिकेशन’ दर्ज है. जब तक जांच पूरी नहीं होती, वे वोट नहीं डाल सकेंगे.

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14 फरवरी को थी एसआईआर हियरिंग की आखिरी तारीख

चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण में नवंबर-दिसंबर के दौरान दस्तावेजों की जांच कर कई नामों को मंजूरी दी गयी थी. बाद में चुनाव आयोग के माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने कुछ मामलों को दोबारा जांच के लिए भेज दिया. 14 फरवरी को सुनवाई की आखिरी तारीख थी. इसके ठीक पहले लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 60 लाख से ज्यादा हो गयी.

14 फरवरी को बंद हो गया दस्तावेज अपलोड करने का ऑप्शन

कई चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) का कहना है कि जिन नामों को पहले सही मानकर मंजूरी दी गयी थी, उन्हें बाद में ‘रिवर्स’ कर दिया गया. 14 फरवरी को ECINET पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का विकल्प भी बंद कर दिया गया. इससे सुधार का मौका नहीं मिला.

3 राज्यों के 530 अधिकारी कर रहे दस्तावेजों की जांच

अब पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 530 न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गयी है. ERO को भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि उनके क्षेत्र के कितने मामले लंबित हैं. इससे मतदाता और अधिकारी दोनों असमंजस में हैं.

अधर में लाखों वोटर का मामला

चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची में जिन लोगों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखा गया है, उनका अंतिम फैसला अगली सप्लीमेंट्री लिस्ट में होगा. अगर जांच में उनके सभी दस्तावेज सही पाये जाते हैं, तो उन्हें वोटर लिस्ट में मतदाता के रूप में वैलिडेट कर दिया जायेगा. तब तक लाखों मतदाताओं की तरह भातार पंचायत समिति के कार्यपालक शफीकुल आलम का मामला भी अधर में लटका रहेगा.

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Journalist Rohit
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