दरभंगा में वामदलों का विरोध प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन
बाजार समिति (दरभंगा), 26 सितंबर 2026।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा चुनाव चोरी के खिलाफ वामदलों के विरोध सप्ताह के पहले दिन दरभंगा में दरभंगा-मुजफ्फरपुर रोड (N.H57) पर बाजार समिति चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया। प्रतिवाद मार्च लक्की ट्रेडर्स चक जमाल से बाजार समिति चौक तक निकाला गया।

प्रतिवाद मार्च का नेतृत्व भाकपा (माले) राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार, इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, भाकपा (माले) के जिला कमिटी सदस्य नंदन सिंह, पप्पू कुमार पासवान, शिवन यादव, केशरी यादव, इंसाफ मंच के नेता मो जमशेद, खुशतर अली, मो प्यारे मोहन, मो हम्माद, मो शहजादा, कैलाश पासवान, कोमलकांत यादव, गोविंद यादव, पिंटू कुमार, मो तौकीर आदि शामिल थे।
- बाजार समिति चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किया गया।
- वामदलों के नेताओं ने SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
- बिहार में चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव कराने समेत कई मांगें रखी गईं।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) राज्य कमिटी सदस्य सह प्रदेश उपाध्यक्ष इंसाफ मंच नेयाज अहमद ने कहा कि मोदी सरकार वोट चोरी के मामले में चुनाव आयोग को गिरफ्तार करने के बदले दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे भाकपा माले महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य, छात्र-युवा आंदोलन के उभरता हुआ चेहरा आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वरिष्ठ प्रमुख अधिवक्ता सिविल सोसायटी के प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, राजद के राज्य सभा सांसद मनोज झा, सहित छात्र-युवा, बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार करना और पुलिस के द्वारा वर्वरता कर नेताओं लड़कियों तक के कपड़ों को फाड़ना बहुत ही शर्मनाक, लोकतंत्र और संविधान विरोधी है।

नेयाज अहमद ने कहा कि इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त की वोट चोरी पकड़े जाने के बाद चुनाव आयोग को हार हालत में जाना होगा।
भाकपा (माले) के राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया को रद्द होना चाहिए। विभिन्न राज्यों में अब तक काटे गए दस करोड़ मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए। बिहार और बंगाल में पुनः चुनाव करवाया जाए। और चुनाव आयोग नियुक्त करने वाली कमिटी को भंग कर चुनाव को पारदर्शी मताधिकार की गारंटी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्षी दल के नेता को शामिल कर कमिटी बनाई जाए। चुनाव आयोग पर महाअभियोग चलाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।
भाकपा (माले) जिला कमिटी सदस्य नंदन सिंह व केशरी यादव ने कहा कि विपक्ष को कभी सत्ता में नहीं आने देने के लिए ही चुनाव आयोग के नियुक्ति प्रक्रिया को बदल कर देश के मुख्य न्यायाधीश को कमिटी से हटा कर गृह मंत्री को रखा बल्कि चुनाव आयोग पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो यह कानून पास करवा लिया गया। जो संविधान-लोकतंत्र विरोधी है।

नेताओं ने मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री मोदी की रहनुमाई में देश से गद्दारी कर 10 करोड़ लोगों के मताधिकार को छिनने का आरोप लगाया और देशद्रोह के आरोप में मुख्य चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की मांग की।
गौरतलब है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी रहा है। 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में ECI की SIR प्रक्रिया की वैधानिकता को बरकरार रखा था। अदालत ने इसे मतदाता सूची को सटीक और विश्वसनीय बनाने तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ा अभ्यास माना था।
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