भगत सिंह जयंती पर दरभंगा में माले का प्रतिवाद मार्च, CEC ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग
पोलो मैदान से लहेरियासराय टावर तक निकला मार्च, SIR पर रोक और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की उठी मांग
📌 खबर की बड़ी बातें
- भगत सिंह जयंती पर लहेरियासराय में भाकपा(माले) ने प्रतिवाद मार्च निकाला।
- माले नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR पर तत्काल रोक की मांग की।
- मार्च में मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
दरभंगा, 28 सितंबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वाम दलों के विरोध सप्ताह के तहत भगत सिंह जयंती के अवसर पर भाकपा(माले) ने लहेरियासराय में प्रतिवाद मार्च निकाला। प्रतिवाद मार्च पोलो मैदान से निकलकर लहेरियासराय टावर पहुंचा, जहां यह सभा में तब्दील हो गया।

वाम दलों ने 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विरोध कार्यक्रम का आह्वान किया है। CPI(ML)-Liberation समेत वाम दलों के संयुक्त बयान में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR रोकने और कथित रूप से गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग रखी गई है।
पोलो मैदान से टावर तक निकला मार्च
इस अवसर पर जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, अभिषेक कुमार, नंदलाल ठाकुर, संदीप कुमार चौधरी, हरि पासवान, विनोद सिंह, विश्वनाथ पासवान, शनिचर पासवान, साधना शर्मा, कामेश्वर पासवान, सिवान यादव, बसंती देवी, राजन प्रसाद सिंह, देवेंद्र कुमार, शौकत अंसारी, मोहम्मद मोजिब, जमालुद्दीन, रंजीत राम, अरविंद राम, विक्की विराट, उमेश साह, कल्याण भारती, रामदेव मंडल सहित कई लोग शामिल थे।
माले ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
इस अवसर पर भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम करने का मुद्दा विपक्ष उठाते रहा है। उन्होंने दावा किया कि आयोग के भीतर से सामने आए तथ्यों ने इस मिलीभगत का खुलासा किया है। उनके अनुसार 26 सितंबर को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक तरह से उसका कबूलनामा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्वीकार किया है कि आगे से बैठकों का एजेंडा पहले ही सर्कुलेट किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि इससे पहले ऐसा क्यों नहीं किया गया और इस पर आयोग को जवाब देना चाहिए।
इन आरोपों और सवालों के बीच निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं और सामग्री उपलब्ध है।
पश्चिम बंगाल के 16 लाख मतदाताओं का मुद्दा उठाया
आगे माले नेताओं ने पश्चिम बंगाल का मामला उठाते हुए कहा कि वहां 16 लाख लोगों को पहले योग्य मतदाता माना गया था, लेकिन बाद में उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए चुनाव आयोग ने ट्रिब्यूनल में अपील की। अपने इस अपराध पर आयोग ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग की गड़बड़ियों के कारण मतदाता सूची से बाहर हुए लोग आखिर फॉर्म-6 क्यों भरें?
हालिया रिपोर्टिंग में भी पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची और SIR से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों तथा चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर विवाद का उल्लेख हुआ है। इन मुद्दों पर आयोग और राजनीतिक दलों के बीच दावे-प्रतिदावे जारी हैं।
SIR पर तत्काल रोक और चुनाव दोबारा कराने की मांग
उन्होंने कहा कि अब बहुत हो चुका है। ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा। उनके नेतृत्व में चुनाव आयोग नहीं चल सकता। पहले कहा गया था कि SIR के जरिए शुद्ध मतदाता सूची तैयार की गई है, लेकिन अब कहा जा रहा है कि इसमें छूटे हुए लोगों को जोड़ा जाएगा। हमारी स्पष्ट मांग है कि SIR पर तत्काल रोक लगाई जाए और SIR के बाद हुए चुनावों को फिर से कराया जाए। मुख्य चुनाव आयुक्त के नियुक्ति प्रक्रिया को भी ठीक किया जाए।

CPI(ML) ने हालिया सार्वजनिक बयानों में भी SIR रोकने, कथित रूप से बाहर किए गए मतदाताओं के अधिकार बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग दोहराई है।
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Journalist Rohit | Editor-In-Chief
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