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Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हाईकोर्ट के आदेश के 16 सप्ताह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई!
जविप्र विक्रेता ने डीएम दरभंगा से लगाई गुहार
सीडब्ल्यूजेसी संख्या 16819/2025 में पटना हाईकोर्ट द्वारा 8 सप्ताह के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिए जाने के बावजूद 16 सप्ताह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कोई निर्णय नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
🔥 मुख्य बातें
- पटना हाईकोर्ट ने सीडब्ल्यूजेसी संख्या 16819/2025 में 8 सप्ताह के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिया था।
- आदेश की प्रति 30 जनवरी 2026 को एसडीओ सदर कार्यालय में जमा की गई थी।
- आवेदक महेश राम ने 16 सप्ताह बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।
- जिला पदाधिकारी दरभंगा से हस्तक्षेप कर कार्रवाई कराने की मांग की गई है।
📌 क्या है पूरा मामला?
दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत माऊँबेहट निवासी एवं जन वितरण प्रणाली (जविप्र) विक्रेता
महेश राम ने जिला पदाधिकारी, दरभंगा को आवेदन देकर न्यायालय के आदेश के अनुपालन में देरी की शिकायत की है।

आवेदन में कहा गया है कि पटना उच्च न्यायालय में दायर
सीडब्ल्यूजेसी संख्या-16819/2025 में पारित आदेश की मूल प्रति उन्होंने दिनांक 30 जनवरी 2026 को अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) दरभंगा कार्यालय में जमा कर दी थी।
माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया था कि संबंधित मामले में 8 सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
लेकिन आवेदक का आरोप है कि अब तक लगभग 16 सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी कोई अंतिम आदेश या कार्रवाई नहीं की गई।
⚖️ हाईकोर्ट के आदेश का उल्लेख
आवेदन के अनुसार माननीय पटना उच्च न्यायालय ने संबंधित प्रकरण में अनुमंडल पदाधिकारी, सदर दरभंगा को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक निर्णय लेने एवं कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
आवेदक का कहना है कि न्यायालय के आदेश का समयबद्ध अनुपालन नहीं होने से उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
🗣️ आवेदक ने क्या कहा?
महेश राम ने अपने आवेदन में बताया है कि वे अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं तथा जन वितरण प्रणाली के लाइसेंसधारी विक्रेता हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप करने तथा न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
📋 डीएम से की गई प्रमुख मांग
- मामले में तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप।
- हाईकोर्ट के आदेश का शीघ्र अनुपालन।
- लंबित मामले में समयबद्ध निर्णय।
- अनुमंडल पदाधिकारी स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना।
📄 आवेदन के साथ क्या संलग्न किया गया?
आवेदक द्वारा जिला पदाधिकारी को दिए गए आवेदन के साथ माननीय पटना उच्च न्यायालय के आदेश की छह पृष्ठों की छायाप्रति संलग्न की गई है।
यह समाचार आवेदक द्वारा जिला प्रशासन को दिए गए आवेदन एवं उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारी की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।
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