एक जमीन पर दो खतियान का खेल खत्म, सरकार का आदेश— जमीन पर मालिकाना हक का सबूत देना होगा

एक जमीन पर दो खतियान का खेल खत्म, सरकार का आदेश— जमीन पर मालिकाना हक का सबूत देना होगा

Bihar Bhumi: बिहार में एक ही जमीन पर कैडस्ट्रल सर्वे और रिविजनल सर्वे के दो-दो अधिकार अभिलेख के खेल पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी जिलों के समाहर्ताओं को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरकारी भूमि पर मालिकाना हक का दावा करने वालों को अब ठोस ‘स्वामित्व प्रमाण’ देना होगा.

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बिना वैध दस्तावेज के किसी भी निजी दावे को मान्य नहीं किया जाएगा.

दरभंगा से उठा सवाल, पूरे बिहार के लिए जवाब

इस मुद्दे की गंभीरता मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा और उपमुख्यमंत्री के जन कल्याण संवाद के दौरान सामने आई थी. खासकर दरभंगा के जिलाधिकारी ने यह सवाल उठाया था कि जब एक ही भूमि पर दो अलग-अलग अभिलेख मौजूद हों, तो किसे अंतिम माना जाए. इसी के बाद विभाग ने 3 फरवरी को सभी जिलों के समाहर्ताओं को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए.

कैडस्ट्रल सर्वे को माना गया मूल दस्तावेज

राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1890 से 1920 के बीच हुआ कैडस्ट्रल सर्वे बिहार का पहला और मूल भूमि सर्वे है. इसमें सरकारी भूमि, सैरात और गैरमजरूआ जैसी श्रेणियां स्पष्ट रूप से दर्ज हैं. ऐसे में जहां कैडस्ट्रल सर्वे में भूमि का स्वरूप सरकारी दर्ज है, वही प्रविष्टि प्राथमिक और मूल प्रमाण मानी जाएगी.

सरकार ने साफ किया है कि यदि रिविजनल सर्वे में किसी सरकारी भूमि का नाम निजी व्यक्ति के नाम दर्ज हो गया हो, तो भी वह स्वतः रैयती नहीं मानी जाएगी. भूमि का स्वरूप तभी बदलेगा, जब समाहर्ता द्वारा विधिवत आदेश पारित कर सरकारी भूमि का बंदोबस्त किसी व्यक्ति के नाम किया गया हो और उसका प्रमाण राज्य सरकार के अभिलेख में मौजूद हो.

दावा करने वालों को देना होगा ठोस सबूत

अब कोई भी व्यक्ति यदि सरकारी भूमि पर मालिकाना हक का दावा करता है, तो उसे यह साबित करना होगा कि भूमि का वैध रूप से हस्तांतरण हुआ है. सिर्फ लंबे समय से कब्जा या नाम दर्ज होना पर्याप्त नहीं होगा. समाहर्ता के आदेश से लैंड सेटलमेंट अनिवार्य शर्त होगी.

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सरकारी भूमि पर यदि कोई व्यक्ति 30 वर्ष या उससे अधिक समय से अवैध कब्जे में है, तब भी अंचल अधिकारी नोटिस जारी करेंगे और भूमि का संरक्षण करेंगे. यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय का कोई विपरीत आदेश लागू न हो.

भूमि विवादों पर बड़ा असर

इस फैसले को बिहार में सरकारी जमीन की सुरक्षा और भूमि माफियाओं पर लगाम कसने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. आने वाले दिनों में इससे हजारों भूमि विवादों की तस्वीर बदल सकती है.

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Journalist Rohit
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