- 9 साल के बेटे की संदिग्ध मौत, महीनों से न्याय की गुहार
- प्रशासनिक बेरुखी से टूट गई मां मनीषा कुमारी
- स्कूल प्रबंधन व सिस्टम पर गंभीर आरोप
RxTv BHARAT, ब्यूरो दरभंगा — दरभंगा से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शहर के भटियारीसराय इलाके में अपने 9 वर्षीय बेटे की मौत का न्याय न मिलने से एक मां मनीषा कुमारी ने आखिरकार दम तोड़ दिया। महीनों तक थानों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाने वाली यह मां व्यवस्था की बेरुखी से हार गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!परिजनों के अनुसार रविवार को मनीषा कुमारी ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। हालत बिगड़ने पर पहले निजी अस्पताल और फिर डीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई की होती, तो आज मनीषा जिंदा होती।
मनीषा का इकलौता बेटा कश्यप कुमार, उम्र 9 वर्ष, लरियासराय स्थित मौनट समर स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। कुछ महीने पहले स्कूल हॉस्टल में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, जिसे स्कूल प्रबंधन और प्रशासन की मिलीभगत से दबाने की कोशिश की गई।
परिजन बताते हैं कि बेटे की मौत के बाद मनीषा एसपी, आईजी, थाना, जनप्रतिनिधि और मीडिया—हर जगह गई, लेकिन उसे सिर्फ आश्वासन मिले, इंसाफ नहीं। न्याय की उम्मीद टूटती गई और वह मानसिक रूप से पूरी तरह बिखर गई। यही दर्द अंततः उसकी जान ले गया।
मनीषा के भाई शिव शंकर कुमार साहू ने कहा कि स्कूल की लापरवाही और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण एक नहीं, दो जिंदगियां चली गईं—पहले मासूम कश्यप और अब उसकी मां। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी स्तर पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई और गरीब परिवार की आवाज को दबा दिया गया।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सिस्टम कब जागेगा? बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ते-लड़ते जान गंवाने वाली मां को न्याय कौन दिलाएगा?
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