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अभया दिवस से पहले दरभंगा में डॉक्टरों ने उठाई आवाज: ‘चिकित्सक सुरक्षित होंगे, तभी मरीज भी सुरक्षित रहेंगे’
दरभंगा। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हिंसा की घटनाओं को लेकर चिकित्सा जगत में चिंता बढ़ रही है। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) के आह्वान पर 9 अगस्त को ‘अभया दिवस’ मनाया जाएगा। इसकी पूर्व संध्या पर दरभंगा ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के आईपास कक्ष में चिकित्सकों ने पत्रकारों से बातचीत कर स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

कार्यक्रम में चिकित्सकों ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को भय और हिंसा के माहौल में काम करना पड़ेगा तो इसका असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवा पर भी पड़ सकता है।
‘यह सिर्फ डॉक्टरों की सुरक्षा का सवाल नहीं’
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ओम प्रकाश ने स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हिंसा की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 8 से 38 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मी अपने कार्यकाल में कभी न कभी शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं। मौखिक दुर्व्यवहार, धमकी और उत्पीड़न को शामिल करने पर समस्या और व्यापक हो जाती है।

डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि हिंसा स्वास्थ्य कर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और रोगी सेवा की गुणवत्ता पर भी असर डालती है। उन्होंने कहा कि यह केवल चिकित्सकों की सुरक्षा की बात नहीं है, बल्कि उस विश्वास की रक्षा का सवाल है, जिस पर पूरी चिकित्सा व्यवस्था टिकी हुई है।
महाराष्ट्र की घटना के बाद फिर उठे सुरक्षा के सवाल
सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. कुमुदनी झा ने महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित शास्त्रीनगर नगरपालिका अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों पर कथित हमले की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने चिकित्सा जगत को विचलित किया और इसके बाद चिकित्सकों ने विरोध दर्ज कर स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि चिकित्सक मरीज का जीवन बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की भी अपनी सीमाएं होती हैं। किसी प्रतिकूल परिणाम को सीधे लापरवाही मानकर चिकित्सक या स्वास्थ्य कर्मी पर हमला करना अमानवीय और अस्वीकार्य है।
डॉ. कुमुदनी झा ने विशेष रूप से महिला चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
‘भय के माहौल में सुरक्षित इलाज संभव नहीं’
सोसाइटी की सचिव डॉ. राजश्री पूर्वे ने कहा कि भय के वातावरण में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा संभव नहीं है। स्वास्थ्य कर्मियों को काम करने के लिए सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है।
वहीं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा महासाठ ने कहा कि चिकित्सक और रोगी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों बीमारी के खिलाफ एक ही पक्ष में खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि पीजी रेजिडेंट पहली पंक्ति में होने के कारण बार-बार भीड़ की प्रताड़ना और कई बार हिंसा का सामना करती हैं। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

चिकित्सकों ने कहा—हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी
कार्यक्रम की चर्चा में डॉ. अलका मिश्रा, डॉ. मधु सिन्हा, डॉ. राखी कुमारी सहित परिचारिकाओं ने भी हिस्सा लिया। चिकित्सकों ने स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।
FOGSI की ओर से ‘अभया दिवस’ के माध्यम से अपनी आवाज उठाने और हिंसा के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया गया है। कार्यक्रम में चिकित्सकों ने कहा कि अस्पतालों में सुरक्षित माहौल जरूरी है और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
चिकित्सकों का संदेश स्पष्ट है—चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी सुरक्षित रहेंगे, तभी मरीजों को भी सुरक्षित और बेहतर चिकित्सा सेवा मिल सकेगी।
अभया दिवस 9 अगस्त को
9 अगस्त को अभया दिवस के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया गया है। दरभंगा में कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर चिकित्सकों ने सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सुरक्षित चिकित्सा वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- FOGSI के आह्वान पर 9 अगस्त को ‘अभया दिवस’ मनाया जाएगा।
- दरभंगा ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ने चिकित्सकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
- डॉ. ओम प्रकाश ने स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हिंसा पर गंभीर चिंता जताई।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए 8 से 38 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों के शारीरिक हिंसा का सामना करने की बात कही गई।
- डॉ. कुमुदनी झा ने महिला चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
- डॉ. राजश्री पूर्वे ने सुरक्षित चिकित्सा सेवा के लिए भयमुक्त वातावरण को जरूरी बताया।
- डॉ. पूजा महासाठ ने चिकित्सक और मरीज को बीमारी के खिलाफ एक ही पक्ष में बताया।
- पीजी रेजिडेंट को भीड़ की प्रताड़ना और हिंसा का सामना करने की बात सामने आई।
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