18 साल से पति-पत्नी के हाथ में सत्ता, सरायकेला में बनते रहे पार्षद

18 साल से पति-पत्नी के हाथ में सत्ता, सरायकेला में बनते रहे पार्षद

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश और प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Saraikela Civic Polls: झारखंड के सरायकेला नगर पंचायत का वार्ड संख्या छह एक बार फिर चर्चा में है. वजह यह है कि पिछले 18 वर्षों से इस वार्ड की सत्ता पति-पत्नी के बीच ही घूमती रही है. कभी पति पार्षद बने, तो कभी पत्नी. आरक्षण बदला, रोस्टर बदला, लेकिन सत्ता का केंद्र नहीं बदला.

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2008 से शुरू हुआ सत्ता का सिलसिला

झारखंड गठन के बाद वर्ष 2008 में पहली बार नगर पंचायत चुनाव हुआ. उस समय वर्तमान वार्ड नंबर छह, तब वार्ड सात था. इस चुनाव में सपन कामिला ने नामांकन दाखिल किया और जीत दर्ज की. यहीं से इस वार्ड में कामिला परिवार के राजनीतिक वर्चस्व की नींव पड़ी. स्थानीय राजनीति में सपन कामिला की पकड़ मजबूत होती चली गई.

2013 में पत्नी को बनाया प्रत्याशी

वर्ष 2013 के निकाय चुनाव में वार्ड का आरक्षण बदल गया और सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई. ऐसे में सपन कामिला ने रणनीति बदली और अपनी पत्नी बबीता कामिला को चुनावी मैदान में उतारा. बबीता कामिला ने चुनाव जीतकर यह साफ कर दिया कि वार्ड की सत्ता परिवार के हाथ से निकलने वाली नहीं है. इस जीत के बाद पति-पत्नी की राजनीतिक जोड़ी और मजबूत हो गई.

2018 में फिर लौटे सपन कामिला

2018 के नगर पंचायत चुनाव में रोस्टर के आधार पर वार्ड से महिला आरक्षण हटा दिया गया. मौका मिलते ही सपन कामिला ने एक बार फिर दावेदारी ठोकी. चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और पार्षद बनकर दोबारा सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली. इस चुनाव के बाद यह चर्चा आम हो गई कि वार्ड छह में मुकाबला असल में उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि एक ही परिवार के भीतर होता है.

2026 में निर्विरोध जीत की स्थिति

वर्ष 2026 में हो रहे नगर निकाय चुनाव में वार्ड छह एक बार फिर महिलाओं के लिए आरक्षित है. इस बार भी बबीता कामिला ने नामांकन दाखिल किया. खास बात यह है कि वार्ड छह से सिर्फ एक ही प्रत्याशी ने नामांकन किया है. ऐसे में बबीता कामिला की जीत लगभग तय मानी जा रही है. अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है.

वार्ड में क्या कहते हैं लोग

स्थानीय लोगों के अनुसार, लंबे समय से एक ही परिवार के सत्ता में बने रहने से वार्ड में विकास के साथ-साथ सवाल भी उठते रहे हैं. कुछ लोग इसे अनुभव और पकड़ का नतीजा मानते हैं, तो कुछ इसे लोकतंत्र में विकल्पों की कमी से जोड़कर देखते हैं.

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सत्ता की चाबी अब भी परिवार के पास

18 वर्षों में चार चुनाव और हर बार सत्ता कामिला परिवार के पास ही रही. सरायकेला नगर पंचायत का वार्ड छह इस मायने में अलग है, जहां आरक्षण बदला, चेहरे बदले, लेकिन सत्ता की चाबी हमेशा पति-पत्नी के हाथ में ही रही.

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Journalist Rohit
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