अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर 2026 पर विशेष संदेश
शिक्षा को जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति बताते हुए निरक्षरता मुक्त समाज का लिया संकल्प
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर शिक्षक मो. राजीक हुसैन ने देशवासियों के नाम विशेष संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति है।
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उन्होंने कहा कि साक्षरता किसी भी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति की पहली सीढ़ी है। शिक्षा मनुष्य को सोचने, समझने, निर्णय लेने और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को पहचानने की क्षमता प्रदान करती है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी से संकल्प लेने की अपील की कि आसपास कोई भी व्यक्ति शिक्षा के प्रकाश से वंचित न रहे। उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रेरित करने और पढ़ना-लिखना नहीं जानने वाले लोगों की मदद करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की जिम्मेदारी है। एक शिक्षित बेटी, शिक्षित परिवार की नींव रखती है। इसलिए बेटियों की शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश समझना चाहिए।
संदेश में हर बच्चे के विद्यालय जाने, किसी भी बच्चे के शिक्षा से वंचित नहीं रहने, निरक्षर लोगों को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करने तथा बेटियों की शिक्षा को विशेष महत्व देने का संकल्प लेने की बात कही गई।
साथ ही शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिकता और जिम्मेदारी को बढ़ावा देने, डिजिटल युग में डिजिटल साक्षरता को अपनाने तथा शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता और समानता लाने पर जोर दिया गया।
संदेश में कहा गया कि कलम में वह ताकत है, जो अज्ञानता को मिटा सकती है और शिक्षा में वह शक्ति है, जो इंसान एवं समाज का भविष्य बदल सकती है। ऐसा भारत बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए जहां हर हाथ में किताब, हर बच्चे के हाथ में कलम और हर घर में शिक्षा का दीपक हो।
संदेश का संकल्प है— “निरक्षरता मुक्त समाज—शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर भारत।” साथ ही शिक्षा का दीप जलाने और हर जीवन को ज्ञान से सजाने का आह्वान किया गया।
🔴 मुख्य बातें
- 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है।
- शिक्षा को जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति बताया गया।
- हर बच्चे को विद्यालय भेजने का संकल्प लेने की अपील।
- निरक्षर लोगों को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करने पर जोर।
- बेटियों की शिक्षा को विशेष महत्व देने की अपील।
- डिजिटल साक्षरता को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
- शिक्षा के माध्यम से जागरूकता और समानता लाने का आह्वान।
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