“फाइन लीजिए, बदतमीजी नहीं” महिला डॉक्टर की गुहार, जवाब में बंदूक और गालियां दरभंगा पुलिस का शर्मनाक चेहरा

“फाइन लीजिए, बदतमीजी नहीं” महिला डॉक्टर की गुहार, जवाब में बंदूक और गालियां दरभंगा पुलिस का शर्मनाक चेहरा

🚨 दरभंगा में सुशासन पर सवाल!
👩‍⚕️ महिला डॉक्टर से बीच सड़क बदसलूकी
🔫 थानेदार का रौद्र रूप कैमरे में कैद

रिपोर्ट: RxTv BHARAT | स्थान: दरभंगा | तिथि: 28 जनवरी 2026

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“संकल्प से समृद्धि” का नारा देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दरभंगा आगमन से ठीक पहले शहर से आई तस्वीरों ने
बिहार में सुशासन और महिला सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
दरभंगा के बेता थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है,
क्लिक करे देखे वायरल वीडियो

जिसमें वह बीच सड़क पर गाली-गलौज, हाथापाई और सरकारी पिस्तौल के साथ थानेदारी का रौब दिखाते नजर आ रहे हैं।
यह पूरा मामला शहर की चर्चित डॉक्टर स्व. सुशीला ठाकुर की नतिनी और स्वयं डॉक्टर तेजस्विनी पांडे से जुड़ा है।जानकारी के अनुसार, डॉक्टर तेजस्विनी पांडे अपने ड्राइवर के साथ कार से घर लौट रही थीं।
Google Map के निर्देश पर वह हाल ही में वन-वे घोषित वीआईपी रोड पर प्रवेश कर गईं।
डॉक्टर ने खुद स्वीकार किया कि वन-वे में प्रवेश करना उनकी गलती थी, लेकिन आरोप है कि सिर्फ इसी बात पर थाना प्रभारी ने कानून की सारी सीमाएं लांघ दीं।पीड़िता का आरोप है कि थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार ने पहले कार के शीशे पर सरकारी पिस्तौल से वार किया, फिर ड्राइवर को गालियां दीं,
मारपीट की और जान से मारने जैसी धमकियां दीं।
महिला डॉक्टर का कहना है कि इतनी भद्दी और अश्लील गालियां दी गईं जिन्हें सार्वजनिक रूप से दोहराया भी नहीं जा सकता।डॉक्टर तेजस्विनी पांडे के अनुसार, जब ड्राइवर ने कहा कि गाड़ी में “मैडम बैठी हैं”,
तब भी थाना प्रभारी नहीं रुके, बल्कि और उग्र हो गए।
उन्होंने कहा – “मैडम बैठी है तो क्या? आज बता देंगे।”
यही नहीं, ड्राइवर के फोन जबरन छीने गए, गाड़ी की चाबी फेंकी गई
और गर्दन पर बंदूक लगाकर उसे गाड़ी से उतारा गया।

पीड़िता ने बताया कि जब उन्होंने शांतिपूर्वक कहा कि “जो फाइन बनता है, वो ले लीजिए,
लेकिन बदतमीजी मत कीजिए”, तो जवाब मिला –
“हम भी आपसे बदतमीजी कर सकते हैं और कहेंगे कि नहीं की।”
यह बयान किसी महिला के लिए कितना डरावना हो सकता है,
इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

डॉक्टर तेजस्विनी ने साफ कहा कि उस वक्त उन्हें बेहद असुरक्षित महसूस हुआ।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ट्रैफिक पुलिस मौके पर मौजूद थी,
तो एक थाना प्रभारी का इस तरह हस्तक्षेप करना और हिंसक रवैया अपनाना
किस नियम के तहत आता है?

गौर करने वाली बात यह है कि यह पहला मामला नहीं है।
इससे पहले भी थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार पर पत्रकारों से अभद्रता के आरोप लग चुके हैं।
मामला एसएसपी तक पहुंचा था, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अब सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही
कानून के रक्षक इस तरह कानून तोड़ते नजर आएं,
तो आम जनता और महिलाओं की सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए?
क्या इस बार दरभंगा पुलिस और जिला प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करेगा,
या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

पीड़िता की मांग: दोषी पुलिस पदाधिकारी पर सख्त कार्रवाई,
ताकि भविष्य में कोई महिला खुद को असुरक्षित महसूस न करे।

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Journalist Rohit
CHANNEL HEAD & EDITOR
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