मुख्य बातें
Bharat Bandh: कोलकाता. केंद्रीय श्रमिक संगठनों की गुरुवार को बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का पश्चिम बंगाल में कोई असर नहीं दिखा. सड़कों पर वाहन आम दिनों की तरह चलते नजर आये और राज्य सरकार एवं निजी कार्यालयों में भी उपस्थिति सामान्य रही. केंद्रीय श्रमिक संगठनों के एक संयुक्त मंच ने चार श्रम संहिताओं को रद्द करने और मजदूरों एवं किसानों पर असर डालने वाली कई नीतियों को वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था. कोलकाता और दूसरे जिलों में निजी और सरकारी वाहन आम दिनों की तरह दौड़ते नजर आये और स्कूल भी खुले रहे.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कुछ जगहों पर हुआ प्रदर्शन
माकपा की छात्र इकाई एसएफआई ने बंद के समर्थन में यादवपुर और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालयों के सामने प्रदर्शन किया. इस दौरान किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. गुरुवार को राज्य बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षा का पहला दिन होने के मद्देनजर यह सुनिश्चित किया गया कि विद्यार्थियों को उनके परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग मार्ग पर पर्याप्त संख्या में बसें उपलब्ध हों. आम लोगों में बंद को लेकर कोई चर्चा सुनने को नहीं मिली. सड़कों पर आम दिनों की तरह की आवाजाही देखने को मिली.
श्रमिक संगठनों की मांग
- श्रम संहिताओं एवं नियमों को रद्द करना.
- बीज विधेयक को वापस लेना.
- विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेना.
- ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम’को वापस लेना.
- मनरेगा की बहाली अधिनियम को रद्द करें.
- ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को रद्द करें.
ये संगठन हैं शामिल
हड़ताल का आह्वान करने वाले केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने दावा किया कि आंदोलन के लिए करीब 30 करोड़ श्रमिकों का समर्थन हासिल है. संयुक्त मंच में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं.
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