बुजुर्गों के अधिकार पर जागरूकता कार्यक्रम:
भरणपोषण अधिनियम–2007 की प्रमुख धाराएँ समझाईं
- दरभंगा के पेंशनर समाज को जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने भरणपोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 की जानकारी दी।
- ट्रिब्यूनल 90 दिनों में सुनवाई कर ₹10,000 तक मासिक भत्ता देने का आदेश दे सकता है; दान शर्तें पूरी न होने पर दान शून्य घोषित हो सकता है।
- नालसा (2016) के तहत मुफ्त कानूनी सहायता व टोल-फ्री नंबर 15100 उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि बुजुर्गों के भरणपोषण संबंधी मामलों की सुनवाई एवं आदेश के लिए अनुमंडल स्तर पर ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर संबंधित मामले में 90 दिनों के अंदर सुनवाई कर संबंधित पुत्र/पुत्री अथवा रिश्तेदार को ₹10,000 तक मासिक भत्ता देने का आदेश पारित किया जा सकता है।
सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी बुजुर्ग ने इस शर्त के साथ अपनी संपत्ति दान की है कि दान प्राप्तकर्ता उनका भरणपोषण करेगा, परन्तु वह ऐसा नहीं करता, तो उक्त दान को शून्य घोषित किया जाएगा और यह माना जाएगा कि दान कपट, प्रपीड़न या अनावश्यक प्रभाव में किया गया था।
आरती कुमारी ने आगे कहा कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक को अपने शरीर या संपत्ति पर खतरा महसूस होता है, तो वह इसकी सूचना जिला पदाधिकारी को दे सकते हैं। साथ ही बुजुर्गों के लिए नालसा योजना 2016 के तहत कानूनी सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क किया जा सकता है या नालसा के टोल-फ्री नंबर 15100 का उपयोग किया जा सकता है।
कार्यक्रम में अधिवक्ता पुरुषोत्तम कुमार, प्रयास संस्था के विरेंद्र कुमार झा तथा हेल्पेज इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव कुमार ने भी जानकारी साझा की। मौके पर पेंशनर समाज के सदस्य अमर कुमार झा, अरुण कुमार, शिव कुमार अन्य उपस्थित लोग रहे।




