धर्मसभा से गौ सम्मान अभियान तक मिर्जापुर गौशाला से गोरक्षा को जन-आंदोलन का संदेश

- गौ-सेवा, सुरक्षा और सम्मान को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- 1 जनवरी से 1 फरवरी तक चला अखंड मासिक महामंत्र संकीर्तन
- अखंड हवन महायज्ञ, धर्मसभा और शोभायात्रा का आयोजन
- गौ सम्मान आह्वान अभियान से समाज को जोड़ने की पहल
दरभंगा में गोरक्षा और सनातन धर्म के महत्व को लेकर एक ओर जहां “धर्मसभा” के माध्यम से धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर “गौ सम्मान आह्वान अभियान” के ज़रिये गौ-सेवा, सुरक्षा और सम्मान को जन-आंदोलन से जोड़ने की पहल सामने आई है।
धर्मसभा से जुड़े बैनर में गाय को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जोड़ते हुए उसके सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। कृषि कार्य में गाय की भूमिका, यज्ञ-हवन और गुरुकुल परंपरा जैसे दृश्य यह संदेश देते हैं कि सनातन संस्कृति में गौ केवल पशु नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति का आधार मानी जाती है।
वहीं “गौ सम्मान आह्वान अभियान” को सेवा, सुरक्षा और सम्मान के मूल मंत्र के साथ प्रस्तुत किया गया है। इस अभियान की अवधि 01 जनवरी 2026 से 1 फरवरी 2026 बताई गई है, जिसे गौ सम्मान दिवस से जोड़ते हुए समाज के हर वर्ग से जुड़ने की अपील की गई है। अभियान से जुड़ने के लिए मिस्ड कॉल नंबर 9067777323, वेबसाइट www.gausamman.cloud, QR कोड और सोशल मीडिया माध्यमों का उल्लेख किया गया है।
इसी क्रम में दरभंगा जिला के मिर्जापुर स्थित गौशाला प्रांगण में अखंड मासिक महामंत्र संकीर्तन के समापन अवसर पर भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। गौशाला में अखंड महामंत्र संकीर्तन सह अखंड हवन महायज्ञ 1 जनवरी से 1 फरवरी तक चला, जिसका समापन रविवार को विधिवत रूप से किया गया।
समापन के अवसर पर नित्यानंद प्रभु जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो शहर के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए पुनः गौशाला प्रांगण में पहुंची।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि युवराज रत्नेश्वर सिंह उपस्थित रहे। साथ ही गौर कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति श्री लक्ष्मी नारायण पांडे, आकाश अवस्थी (क्षेत्रीय सह प्रमुख, इग्नू), जयशंकर झा, अशोक सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ), डॉ. पूनम (सीडीपीओ, पटना), डॉ. मीनाक्षी (महिला कॉलेज, पटना), कीर्ति मिश्रा एवं डॉ. अलका झा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि गौ-रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दायित्व है। गौशालाओं के संरक्षण के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम का सफल आयोजन आचार्य भक्ति श्री एवं वसुंधरा देवी के नेतृत्व में किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गौ-सेवक, महिलाएं और स्थानीय नागरिक इसमें शामिल हुए।
कुल मिलाकर, यह आयोजन और अभियान दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि गोरक्षा और गौ सम्मान को सामाजिक चेतना और संगठित प्रयास से ही सशक्त बनाया जा सकता है।


