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🚨 मधुबनी में बड़ी कार्रवाई: गंभीर आरोपों में लिपिक सेवा से बर्खास्त
डीएम ने दिखाई सख्ती, दिया स्पष्ट संदेश
मधुबनी जिला प्रशासन ने सरकारी सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए बेनीपट्टी प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित निलंबित लिपिक दिनेश कुमार झा को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में गंभीर आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने यह कठोर निर्णय लिया।
🔥 मुख्य बातें
- बेनीपट्टी प्रखंड के निलंबित लिपिक दिनेश कुमार झा सेवा से बर्खास्त।
- विभागीय जांच में गंभीर आरोप हुए प्रमाणित।
- अनधिकृत अनुपस्थिति और गोपनीय सूचनाएं साझा करने का आरोप।
- न्यायालय संबंधी अभिलेखों के रखरखाव में भी लापरवाही।
- पहले भी कई विभागीय कार्रवाइयों का सामना कर चुके थे कर्मी।
- डीएम आनंद शर्मा ने जारी किया बर्खास्तगी आदेश।
🏛️ विभागीय जांच के बाद हुई कार्रवाई
जिलाधिकारी आनंद शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार विभागीय कार्यवाही के दौरान लगाए गए आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए। इसके बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया।

प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार संचालित की गई और संबंधित कर्मी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी दिया गया।
⚖️ क्या थे आरोप?
जांच में पाया गया कि संबंधित कर्मी बार-बार बिना अनुमति कार्यालय से अनुपस्थित रहते थे। इसके अलावा न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों का समुचित संधारण नहीं किया गया।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कार्यालय से जुड़ी संवेदनशील एवं गोपनीय सूचनाएं अनधिकृत व्यक्तियों तक पहुंचाई गईं, जो सरकारी सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया।
कार्यालयीन अनुशासन की अनदेखी और सरकारी कार्यों में लापरवाही के आरोप भी प्रमाणित पाए गए।
📋 संतोषजनक जवाब नहीं दे सके कर्मी
विभागीय जांच के दौरान संबंधित कर्मी को कई बार अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया गया। हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच प्रतिवेदन के आधार पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
इसके बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।
📂 पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मी के खिलाफ पूर्व में भी कई विभागीय कार्यवाहियां संचालित की जा चुकी थीं।
विभिन्न मामलों में दंड दिए जाने के बावजूद उनके कार्य व्यवहार और आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया।
🗣️ डीएम का स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने कहा है कि सरकारी सेवकों से उच्च स्तर की जवाबदेही, अनुशासन और नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता, गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग तथा सरकारी कार्यों में लापरवाही को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
🚫 “जीरो टॉलरेंस” नीति का संदेश
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई को अपनी “शून्य सहिष्णुता नीति” का हिस्सा बताया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय सभी सरकारी कर्मियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि सेवा नियमों और प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन ने दोहराया कि पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी का संदेश :
“सरकारी सेवकों से उच्च स्तर की जवाबदेही और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। कर्तव्यहीनता, लापरवाही और गोपनीय अभिलेखों के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
📌 प्रशासन का सख्त रुख
मधुबनी जिला प्रशासन की यह कार्रवाई सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इससे अन्य सरकारी कर्मियों को भी सेवा नियमों और अनुशासन के प्रति गंभीर रहने का संदेश मिलेगा।
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