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LNMU ने बिहार में बनाया बड़ा रिकॉर्ड, राज्यपाल ने कुलपति के प्रेजेंटेशन की सराहना की

मुख्य बातें
- डिजिलॉकर पर डिग्रियां अपलोड करने में LNMU बिहार में प्रथम
- समर्थ मॉड्यूल लागू करने में विश्वविद्यालय को मिला दूसरा स्थान
- राज्यपाल सह कुलाधिपति ने कुलपति के प्रेजेंटेशन की सराहना की
- 11 लाख से अधिक डिग्रियां डिजिलॉकर पर अपलोड
बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत) के समक्ष लोक भवन, पटना में आयोजित बैठक में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी का पीपीटी प्रेजेंटेशन काफी सराहनीय रहा।

बैठक में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और उच्च शिक्षा में किए जा रहे सुधारों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। परंपरागत विश्वविद्यालयों में डिजिलॉकर पर डिग्रियां अपलोड करने के मामले में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय बिहार में प्रथम स्थान पर रहा, जबकि समर्थ मॉड्यूल लागू करने में विश्वविद्यालय ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बताया गया कि अब तक 11 लाख से अधिक डिग्रियां डिजिलॉकर पर अपलोड की जा चुकी हैं। इस उपलब्धि पर कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि वर्ष 2020 से पहले की डिग्रियों को भी क्रमबद्ध तरीके से डिजिलॉकर पर अपलोड किया जाए।
📌 LNMU की बड़ी उपलब्धियां:
✔️ डिजिलॉकर पर 11 लाख से अधिक डिग्रियां अपलोड
✔️ बिहार में प्रथम स्थान हासिल
✔️ समर्थ मॉड्यूल लागू करने में दूसरा स्थान
✔️ NAAC के तीसरे चक्र में B++ ग्रेड पाने वाला बिहार का एकमात्र पारंपरिक विश्वविद्यालय
प्रेजेंटेशन के दौरान विश्वविद्यालय ने भविष्य की योजनाओं को भी प्रस्तुत किया। इनमें एकेडमिक मॉड्यूल, थीसिस मैनेजमेंट मॉड्यूल, बजट मॉड्यूल तथा स्टेट मॉड्यूल पर काम करने की योजना शामिल है।

कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन में बी प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त करने की भी प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन. के. अग्रवाल को विश्वविद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात को यूजीसी मानकों के अनुरूप बनाने हेतु शिक्षकों की बहाली और भौतिक संसाधनों के विस्तार का निर्देश दिया।
बैठक में विश्वविद्यालय की ओर से यूजीसी पैटर्न के तहत स्नातकोत्तर स्तर पर दो वर्षीय एवं एक वर्षीय पाठ्यक्रम को वर्ष 2026 से लागू करने का आग्रह भी किया गया। कुलाधिपति ने परीक्षा समय पर आयोजित कराने तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र समय से देने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की।
इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित फॉरेन लैंग्वेज कोर्स में अन्य विदेशी भाषाओं को शामिल करने का सुझाव दिया ताकि छात्रों को रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें। एनसीसी को लेकर भी उन्होंने विशेष जोर दिया और कैडेट्स के उपलब्धियों का डाटा संग्रह करने का सुझाव दिया।
बैठक में कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के साथ वित्तीय परामर्शी सह वित्त पदाधिकारी इन्द्र कुमार, कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हंसदा, आइक्यूएसी निदेशक डॉ मो ज्या हैदर, परीक्षा नियंत्रक डॉ इंसान अली सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो मुश्ताक अहमद ने अपने संपादन में प्रकाशित शोध जर्नल “जहाने उर्दू” का 100वां विशेष अंक कुलाधिपति को भेंट किया, जिसकी उन्होंने सराहना की।
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