राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर कॉम्पलेक्स रिसोर्स सेंटर (CRC) की नई व्यवस्था लागू की है, ताकि विद्यालयों और शिक्षकों को एक-दूसरे से जोड़कर पढ़ाई की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके। इसके तहत पंचायत के सभी आंगनबाड़ी, प्राथमिक, मध्य, उच्च एवं उच्चतम विद्यालय एक ही शैक्षणिक कॉम्पलेक्स के रूप में काम करेंगे।

इस नवगठित व्यवस्था में पंचायत स्थित वरीय उच्चतम विद्यालय को कॉम्पलेक्स का मुख्यालय बनाया गया है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक को इसका व्यवस्थापक और पंचायत के मध्य विद्यालय के वरीयतम शिक्षक को कॉम्पलेक्स संसाधन केंद्र समन्वयक (CRCC) नियुक्त किया गया है। वर्तमान में राज्य के सभी 8827 पंचायतों और 75 नगर पंचायतों में CRC सक्रिय हो चुके हैं।

CRC का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को एक साझा मंच देना है, जहां वे अपने अनुभव, समस्याएं और नवाचार आपस में साझा कर सकें। इससे न केवल शिक्षकों के बीच अकादमिक संवाद मजबूत होगा, बल्कि कक्षा-कक्ष में पढ़ाने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।

इसके तहत प्रत्येक माह शिक्षकों की अकादमिक बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक प्रत्येक शनिवार को मध्यान्तर के बाद दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक रोस्टर के अनुसार होगी। अलग-अलग शनिवार को अलग-अलग कक्षाओं और विषयों के शिक्षक शामिल होंगे, ताकि सभी शिक्षकों को अपनी जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन मिल सके। आवश्यकता पड़ने पर पांचवें शनिवार को विशेष बैठक भी आयोजित की जा सकती है।

इन बैठकों में कक्षा शिक्षण के दौरान आने वाली वास्तविक समस्याओं, उनके समाधान, नवाचार और अच्छे प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित और सम्मानित किया जाएगा, वहीं उपयोगी नवाचारों और केस स्टडी को जिला एवं राज्य स्तर पर साझा किया जाएगा।

इसके साथ ही CRCC द्वारा सप्ताह में एक दिन विद्यालयों का भ्रमण किया जाएगा। इस दौरान वे कक्षाओं का अवलोकन कर शिक्षकों को ऑन-साइट मार्गदर्शन देंगे। कक्षा 1 और 2 पर विशेष ध्यान देते हुए शिक्षण प्रक्रिया, पाठ योजना और बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए जाएंगे।

विद्यालय भ्रमण के बाद शिक्षकों को रचनात्मक फीडबैक दिया जाएगा और आवश्यकता अनुसार उपचारात्मक शिक्षण व शिक्षण रणनीतियों पर सहयोग किया जाएगा। प्रत्येक भ्रमण की रिपोर्ट तैयार कर CRC और BRC को सौंपी जाएगी, ताकि आगे की योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सके।

इस पूरी पहल से उम्मीद की जा रही है कि पंचायत स्तर पर शैक्षणिक सहयोग मजबूत होगा, प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी और बच्चों के सीखने के परिणामों में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा।


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