रेलवे के लिए बेहद खास होगा चिकेन नेक कॉरिडोर, बिछेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड ट्रैक

रेलवे के लिए बेहद खास होगा चिकेन नेक कॉरिडोर, बिछेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड ट्रैक

Indian Railways: सिलीगुड़ी: भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र रेलवे विकास की लहर से कई वर्षों तक अछूता रहा है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में यह स्थिति काफी हद तक बदली है. पूर्वोत्तर में कई विकास परियोजनाएं चल रही हैं. इस इलाके में रेल संपर्क को और मजबूत करने के लिए भारतीय रेल एक बेहद सामरिक महत्व की परियोजना पर काम कर रहा है. भारतीय रेलवे का चिकन नेक कॉरिडोर भौगोलिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, यह सामरिक दृष्टि से भी बहुत खास है. इस इलाके पर चीन की गहरी नजर है और चीन के साथ बदलते संबंधों के चलते अब बांग्लादेश भी इस पर ध्यान दे रहा है. ऐसे में इस इलाके में रेलवे ट्रेक का निर्माण बेहद संवेदनशील हो चुका है.

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दो राज्यों से होकर गुजरेगी ट्रेन

भारतीय रेलवे इस संवेदनशील चिकन नेक के लगभग 40 किलोमीटर हिस्से में भूमिगत रेल पटरियां बिछाने की योजना बना रहा है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्वयं इसकी घोषणा की है. इस रेलवे लाइन का निर्माण पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा किया जाएगा. यह लाइन तिनमिल हाट से रंगापानी तक बिछाई जाएगी. बाद में इसे बागडोगरा तक बढ़ाने की बात कही जा रही है. यह रेलवे लाइन दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर और बिहार के किशनगंज से होकर गुजरेगी. इस संबंध में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फरवरी की शुरुआत में कहा था-पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष भाग से जोड़ने वाले इस कॉरिडोर के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है. मौजूदा ट्रैक को चार लाइनों में विभाजित किया जाएगा.

सामरिक दृष्टि से है बेहद महत्वपूर्ण

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि इन दो स्टेशनों का चयन क्यों किया गया है. तिनमिल हट दार्जिलिंग जिले में स्थित है. यह सिलीगुड़ी से 10 किलोमीटर दूर है. वहीं, बांग्लादेश के पंचगढ़ से इसकी दूरी मात्र 68 किलोमीटर है. चिकन नेक में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह रेलवे लाइन बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी. चिकन नेक का उपयोग उत्तर पूर्वी भारत से जुड़ने के लिए किया जा सकता है. इस मार्ग से सैन्य हथियारों से लेकर ईंधन तक सब कुछ भेजा जाता है. चिकन नेक के दक्षिण में बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में चीन की चुंबी घाटी स्थित है. इस चिकन नेक क्षेत्र में जरा सी भी गड़बड़ी होने पर पूरा पूर्वोत्तर भारत अलग-थलग पड़ जाएगा. सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश भी खतरे में पड़ जाएंगे.

हर हमले से सुरक्षित होगा रेलखंड

चिकन नेक में सभी बुनियादी ढांचा जमीन के ऊपर है. किसी हमले या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इसे नुकसान पहुंचने का खतरा है. भूमिगत सुरंग बनाकर इन सभी खतरों से बचा जा सकता है. एक राष्ट्रीय पत्रिका को दिये साक्षात्कार में रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन ने बताया था कि भूमिगत रेलवे इसे हवाई हमलों, ड्रोन हमलों या मिसाइल हमलों से सुरक्षित रखेगा. यदि युद्ध बढ़ता है, तो भूमिगत गलियारा सैनिकों की आवाजाही और ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में सहायक होगा. इसके अतिरिक्त, बागडोगरा स्थित वायुसेना अड्डे और बेंगडुबी स्थित भारतीय सेना के 33वें कोर छावनी से भी संपर्क स्थापित किया जाएगा.

कारोबार को भी मिलेगी नयी रफ्तार

रेल मंत्रालय के सूत्रों की माने तो प्रस्तावित रेल मार्ग में दमदंगी से बागडोगरा तक 35.76 किलोमीटर की रेलवे लाइन और दमदंगी से रंगपानी तक 33.40 किलोमीटर की रेलवे लाइन शामिल होगी. इस रेलवे लाइन में दो 25 किलोवोल्ट एसी विद्युतीकरण प्रणालियां और स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली होगी. सुरंग खोदने वाली मशीनों का उपयोग करके दो भूमिगत सुरंगों का निर्माण किया जाएगा. हम सब जानते है कि रेलवे माल या कार्गो के परिवहन का सबसे तेज़ और सबसे किफायती साधन है. उदाहरण के लिए एक मालगाड़ी 300 ट्रकों के बराबर माल ढो सकती है. ऐसे में इस रेल लाइन के निर्माण से पूर्वोत्तर भारत का शेष भारत से कारोबार भी बेहतर होगा.

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Journalist Rohit
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