भ्रष्टाचार और लापरवाही पर बड़ा एक्शन: कई अंचल अधिकारियों पर मंत्री ने लगाई मुहर
कुछ अधिकारियों पर आरोप पत्र गठित, कुछ को सजा तो एक अधिकारी आरोप मुक्त; 1 और 2 सितंबर को 20 मामलों पर हुआ निर्णय
पटना। बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के तहत कार्यरत रहे कई अंचल अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों और बंदोबस्त पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई को माननीय मंत्री महोदय ने संचिका में स्वीकृति दी है। 1 सितंबर और 2 सितंबर 2026 को मंत्री महोदय के समक्ष पेश हुई फाइलों में कुल 20 मामलों पर निर्णय लिया गया। इनमें भ्रष्टाचार, अनधिकृत अनुपस्थिति, फर्जी जाति प्रमाण-पत्र, अवैध जमाबंदी और लोक शिकायतों को गुमराह करने जैसे आरोप शामिल हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!1 सितंबर को हुई कार्रवाई के प्रमुख मामले
नवादा के भूमि सुधार उप समाहर्ता श्री गौरव शंकर पर टाइटल सूट लंबित रहने के बावजूद दाखिल-खारिज अपील वाद में अपीलकर्ता के पक्ष में निर्णय देने का आरोप है। इस मामले में गठित आरोप पत्र सामान्य प्रशासन विभाग को प्रेषित कर दिया गया है।
शेखपुरा के तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं अब सेवानिवृत्त श्री ओम प्रकाश पर गलत जाति प्रमाण-पत्र जारी करने का आरोप है। कई स्मार और प्रेस विज्ञप्ति के बावजूद बचाव पक्ष नहीं देने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई संचालित कर दी गई है।
बेगूसराय के गढ़पुरा की तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब पटना में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्रीमती रिम्ता कुमारी पर सरकारी कार्यों में अभिरुचि न लेने, दाखिल-खारिज वादों को निर्धारित समय सीमा से आगे लंबित रखने और गलत प्रतिवेदन भेजकर विभाग को गुमराह करने के आरोप हैं। बिहार सीसीए नियमावली-2005 के नियम 18(3) के तहत उनसे अभ्यावेदन मांगा गया है।
लखीसराय की तत्कालीन अंचल अधिकारी सुश्री सुप्रिया आनंद के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है। उन पर अनधिकृत रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने, पंचायत जनप्रतिनिधियों से दुर्व्यवहार करने और दाखिल-खारिज व परिमार्जन जैसे राजस्व कार्यों के निबटारे में बिचौलिये के माध्यम से राशि लेने के गंभीर आरोप हैं।
पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब भोजपुर के उदवंतनगर में पदस्थापित श्री आनंद कुमार पर अनधिकृत अनुपस्थिति और कार्यालय पंजी अद्यतन न करने के आरोप में आरोप पत्र गठित हुआ है।
पटना के फुलवारीशरीफ के तत्कालीन अंचल अधिकारी श्री चंदन कुमार पर दाखिल-खारिज वाद संख्या 11414/2022-23 में रकबा से अधिक दाखिल-खारिज स्वीकृत करने, दोहरी जमाबंदी कायम करने और विभागीय पोर्टल पर जमाबंदी में छेड़छाड़ करने जैसे आरोपों में अनुशासनिक कार्रवाई संचालित की गई है।
दानापुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब कटिहार के मनिहारी में पदस्थापित श्री चंदन कुमार के खिलाफ दानापुर कांड संख्या 1163/2025, दिनांक 08.11.2025 में अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रस्ताव विधि विभाग को भेजा गया है।
वैशाली के महुआ अंचल अधिकारी श्री मणि कुमार वर्मा के मामले में हड़ताल अवधि से जुड़े आरोप को संचिकास्थ कर दिया गया है।
गया के मानपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब सीतामढ़ी के चोरौत में पदस्थापित श्री सुबोध कुमार पर आर्थिक अपराध इकाई की जांच में पार्टीशन सूट लंबित रहने के बावजूद दाखिल-खारिज वाद अवैध ढंग से स्वीकृत करने का आरोप सिद्ध पाया गया। इस मामले में आरोप पत्र गठित किया गया है।
दरभंगा भू-अर्जन कार्यालय के तत्कालीन राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो, अब लखीसराय बंदोबस्त कार्यालय में पदस्थापित मो. शाकिब अलाउद्दीन पर स्थानांतरण आदेश के बावजूद नई जगह योगदान नहीं देने पर आरोप पत्र गठित हुआ है।
खगड़िया के परबत्ता के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब सीतामढ़ी के नानपुर में पदस्थापित श्री चंदन कुमार पर पटना उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में समय पर शपथ पत्र दायर नहीं करने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
बगहा-2 के तत्कालीन अंचल अधिकारी श्री निखिल, जो फिलहाल पदस्थापन के लिए प्रतीक्षारत हैं, पर अभियान बसेरा-2, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और आधार सीडिंग जैसे कार्यों में असंतोषजनक प्रगति का आरोप है। इस मामले में अभ्यावेदन की मांग की गई है।
मधुबनी के रहिका के तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं अब सेवानिवृत्त श्री राम प्रवेश प्रसाद पर गलत केवाला के आधार पर दाखिल-खारिज वाद स्वीकृत करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। इस मामले में भी अभ्यावेदन मांगा गया है।
2 सितंबर को हुई कार्रवाई: किसी को सजा, किसी को बरी
गया के तत्कालीन अपर समाहर्ता, अब मुंगेर में पदस्थापित श्री मनोज कुमार पर जमाबंदी रद्दीकरण वाद संख्या 61/2021-22 और 62/2021-22 में त्रुटिपूर्ण आदेश पारित करने का आरोप था। उनका स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया।
भोजपुर के संदेश के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब जहानाबाद में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्री उमेश चौधरी पर अवैध जमाबंदी सृजित करने और सरकारी जमीन की जमाबंदी निजी व्यक्ति के नाम करने के आरोप में संचयी प्रभाव के साथ दो वेतन वृद्धि रोकने का दंड दिया गया है।
वैशाली के राघोपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब रोहतास के चेनारी में चकबंदी पदाधिकारी श्री संजीव कुमार त्रिवेदी पर दाखिल-खारिज, परिमार्जन, लगान वसूली, ई-मापी, एलपीसी और अभियान बसेरा-2 जैसे कार्यों में लापरवाही के आरोप में आरोप पत्र गठित किया गया है।
भागलपुर के गोराडीह के तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं अब सेवानिवृत्त श्री नवीन भूषण पर 16 परिवारों को सुखाड़ग्रस्त राशि का लाभ निजी स्वार्थवश देने और लोक शिकायत के मामले में गुमराह करने के आरोप थे। जांच के बाद उन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया।
कटिहार के आजमनगर के तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं अब सेवानिवृत्त श्री सुनील कुमार भंडारी को अनधिकृत अनुपस्थिति, मनमानी और आदेशों की अवहेलना के आरोप में तीन वर्षों के लिए पांच प्रतिशत पेंशन कटौती की सजा दी गई है।
पटना के संपतचक के तत्कालीन अंचल अधिकारी, अब पूर्णिया में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्री मुकुल कुमार झा के मामले में पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में स्वत्ववाद संख्या 4747/2014 लंबित रहते हुए भी सात दाखिल-खारिज वादों को स्वीकृत करने का आरोप था। जांच रिपोर्ट को पुनः जांच के लिए संचालन पदाधिकारी को वापस भेज दिया गया है।
मुंगेर के तेतियाबंबर के तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं अब सेवानिवृत्त श्री विनोद कुमार गुप्ता पर बालू, ईंट और ठेलागाड़ी से अवैध वसूली करने, बिना ओवरलोड वाहनों को ओवरलोड बताकर जांच के नाम पर राशि वसूलने और बिना मोटी रकम लिए दाखिल-खारिज नहीं करने के गंभीर आरोप थे। इस मामले में उनकी पेंशन से 10 प्रतिशत उपादान राशि की एकमुश्त कटौती का दंड दिया गया है।
🔴 मुख्य बातें
- 1 और 2 सितंबर 2026 को मंत्री के समक्ष पेश हुई फाइलों में कुल 20 मामलों पर निर्णय लिया गया।
- कई अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया।
- कुछ मामलों में अभ्यावेदन मांगा गया और कुछ मामलों में जांच आगे बढ़ाई गई।
- एक अधिकारी को आरोप मुक्त किया गया।
- कुछ मामलों में वेतन वृद्धि रोकने, पेंशन कटौती और जुर्माने का दंड दिया गया।
- मुंगेर के तेतियाबंबर के तत्कालीन अंचल अधिकारी श्री विनोद कुमार गुप्ता को पेंशन से 10 प्रतिशत उपादान राशि की एकमुश्त कटौती का दंड दिया गया।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इन दो दिनों की कार्रवाई से दाखिल-खारिज, जमाबंदी और अन्य राजस्व कार्यों से जुड़े मामलों में विभागीय स्तर पर की गई अनुशासनिक कार्रवाई सामने आई है। ज्यादातर मामलों में कार्रवाई आरोप पत्र गठित करने या अभ्यावेदन मांगने तक रही, जबकि कुछ मामलों में वेतन वृद्धि रोकने, पेंशन कटौती और जुर्माने जैसे दंड भी दिए गए हैं।






