शिक्षा विभाग की नई स्थानान्तरण नीति जारी: रुग्णता, दिव्यांगता और महिला शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता
शिक्षकों के स्थानान्तरण और पदस्थापन के लिए 10 विकल्प, पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित होगी
पटना: बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के शिक्षकों के स्थानान्तरण एवं पदस्थापन को लेकर एक विस्तृत नीति जारी की है। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह नीति केवल शिक्षा विभाग के अधीन नियुक्त शिक्षकों पर लागू होगी। स्थानीय निकाय द्वारा नियुक्त शिक्षकों पर यह नीति लागू नहीं होगी।
रुग्णता और दिव्यांगता के आधार पर मिलेगी पहली प्राथमिकता
नीति के अनुसार शिक्षकों के पदस्थापन व स्थानान्तरण में रुग्णता, दिव्यांगता व अन्य आधारों पर एक निश्चित अधिमानता क्रम निर्धारित किया गया है।
- असाध्य रोग जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर से स्वयं, पति-पत्नी या बच्चों के प्रभावित होने पर सबसे ऊपर प्राथमिकता दी जाएगी।
- गंभीर रुग्णता में किडनी, डायलिसिस/किडनी ट्रांसप्लांट, हृदय रोग तथा लीवर रोग से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है।
- दिव्यांगता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों में दृष्टि बाधित, मूक-बधिर, अस्थि दिव्यांग, मनोविकार और बहु दिव्यांगता से जुड़े मामलों के अलावा सेवाकाल के दौरान दुर्घटना या शल्य चिकित्सा से हुई दिव्यांगता को भी शामिल किया गया है।
- ऑटिज्म/मानसिक दिव्यांगता से ग्रसित शिक्षक के पति-पत्नी या बच्चों को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
ऐसे मामलों में शिक्षक विकल्प के अनुसार अपने पंचायत/नगर निकाय, प्रखंड, अनुमंडल या जिले में स्थानान्तरण करा सकेंगे। हालांकि स्वयं के गृह पंचायत/नगर निकाय, पति-पत्नी के गृह पंचायत/नगर निकाय या वर्तमान पदस्थापन वाले क्षेत्र में स्थानान्तरण नहीं किया जा सकेगा।
विधवा, परित्यक्ता और महिला शिक्षिकाओं के लिए खास प्रावधान
नीति में विधवा एवं परित्यक्त शिक्षिकाओं तथा सामान्य महिला शिक्षिकाओं को भी विकल्प के आधार पर पंचायत, नगर निकाय, प्रखंड, अनुमंडल या जिले में स्थानान्तरण की सुविधा दी गई है। साथ ही पति के पदस्थापन स्थल के आधार पर भी महिला शिक्षिकाओं का स्थानान्तरण किया जा सकेगा।
पुरुष शिक्षकों के लिए जिले द्वारा दिए गए विकल्प के आधार पर गृह अनुमंडल में स्थानान्तरण की व्यवस्था रखी गई है। किसी विद्यालय विशेष में महिला शिक्षकों के पदस्थापन/स्थानान्तरण की अधिसीमा 70 प्रतिशत तय की गई है।
शिक्षकों की चार श्रेणियां और अनुपात तय
नीति के अनुसार शिक्षा विभाग के अधीन विद्यालयों में चार तरह के शिक्षक कार्यरत हैं—विहित वेतनमान में नियुक्त नियमित शिक्षक, स्थानीय निकाय द्वारा नियुक्त शिक्षक, सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण/विशिष्ट शिक्षक और बीपीएससी द्वारा नियुक्त शिक्षक।
स्थानान्तरण एवं पदस्थापन के समय जिला स्तर पर तथा यथासंभव विद्यालय स्तर पर इन चारों श्रेणियों का अनुपात क्रमशः 10, 30, 30 और 30 प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा।
हर पांच साल पर अनिवार्य स्थानान्तरण
नीति में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक शिक्षक को अपने सेवाकाल के हर पांच वर्ष पर स्थानान्तरण अनिवार्य रूप से कराना होगा। हालांकि रुग्णता व दिव्यांगता से जुड़ी श्रेणियों के शिक्षकों के अभ्यावेदन पर पांच वर्ष पूरे होने से पहले भी स्थानान्तरण पर विचार किया जा सकेगा।
यदि किसी विद्यालय में 05 इकाई स्वीकृत/मानक बल है तो वहां अधिकतम 01 शिक्षक, 10 इकाई वाले विद्यालय में 02 शिक्षक तथा 10 इकाई से अधिक स्वीकृत बल वाले विद्यालयों में अधिकतम 03 शिक्षकों के रुग्णता/दिव्यांगता आधारित पदस्थापन पर विचार किया जाएगा।
10 विकल्प मिलेंगे, सॉफ्टवेयर से होगी पूरी प्रक्रिया
नीति के अनुसार शिक्षकों से स्थानान्तरण/पदस्थापन के लिए 10 विकल्प मांगे जाएंगे और यथासंभव उन्हें निकटतम अनुमंडल या निकटतम जिले में पदस्थापित किया जाएगा।
विकल्प प्राप्त होने के बाद पहले वेतनमान युक्त नियमित शिक्षक, फिर सक्षमता उत्तीर्ण शिक्षक और फिर टीआरई (TRE) द्वारा नियुक्त शिक्षकों को क्रमवार अवसर दिया जाएगा। इसमें जिला स्तरीय वरीयता सूची का भी ध्यान रखा जाएगा।
स्थानान्तरण, पदस्थापन या प्रतिनियुक्ति की पूरी कार्रवाई सॉफ्टवेयर आधारित एप्लीकेशन के माध्यम से ही की जाएगी। रिक्तियों की गणना शिक्षा का अधिकार अधिनियम, छात्र-शिक्षक अनुपात, आधारभूत संरचना और उपलब्धता जैसे मानकों के आधार पर होगी।
दो चरणों में होगी कार्रवाई, समितियां होंगी गठित
पहले चरण में स्थानीय निकाय के शिक्षकों को छोड़कर सभी प्रकार के शिक्षकों का स्थानान्तरण व पदस्थापन मुख्यालय स्तर से किया जाएगा। यदि नियमित शिक्षक, बीपीएससी या टीआरई-1 व 2 के शिक्षक विकल्प नहीं देते हैं, तो उनका स्थानान्तरण नहीं किया जाएगा और वे अपने पदस्थापित विद्यालय में यथावत बने रहेंगे।
इस चरण में सक्षमता उत्तीर्ण व बीपीएससी-टीआरई शिक्षकों को राज्य स्तरीय वरीयता के आधार पर अवसर मिलेगा।
भविष्य में जिले के भीतर स्थानान्तरण की जिम्मेदारी जिला स्थापना समिति को दी जाएगी। इसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। समिति में उप विकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी (सदस्य सचिव), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), अनुसूचित जाति/जनजाति के मनोनीत पदाधिकारी, एक महिला वरीय उप समाहर्ता और एक अल्पसंख्यक पदाधिकारी सदस्य होंगे।
वहीं प्रमंडल के भीतर अंतर-जिला स्थानान्तरण के लिए अलग समिति गठित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे। इसमें प्रमंडल के सभी जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी सदस्य होंगे, जबकि प्रमंडलीय मुख्यालय के जिला शिक्षा पदाधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
🔴 मुख्य बातें
- नई स्थानान्तरण एवं पदस्थापन नीति शिक्षा विभाग के अधीन नियुक्त शिक्षकों पर लागू होगी।
- स्थानीय निकाय द्वारा नियुक्त शिक्षक इस नीति के दायरे में नहीं होंगे।
- रुग्णता और दिव्यांगता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- विधवा, परित्यक्ता और महिला शिक्षिकाओं के लिए विशेष प्रावधान।
- महिला शिक्षकों के पदस्थापन/स्थानान्तरण की अधिसीमा 70 प्रतिशत।
- शिक्षकों से स्थानान्तरण के लिए 10 विकल्प लिए जाएंगे।
- हर पांच वर्ष पर स्थानान्तरण अनिवार्य होगा।
- पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित एप्लीकेशन से होगी।
- जिले के भीतर स्थानान्तरण के लिए जिला स्थापना समिति की व्यवस्था।
- प्रमंडल के भीतर अंतर-जिला स्थानान्तरण के लिए अलग समिति गठित होगी।
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