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महिला शिक्षिका ने प्रभारी प्रधानाध्यापक पर लगाए गंभीर आरोप, DEO ने जारी किया सख्त पत्र
मानसिक प्रताड़ना, अपमान और प्रशासनिक अनियमितता के आरोपों के बाद शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, जवाब नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी।

मुख्य बातें
- महिला शिक्षिका ने प्रभारी प्रधानाध्यापक पर लगाए गंभीर आरोप
- मानसिक प्रताड़ना, अपमान और प्रशासनिक अनियमितता का मामला
- DEO वैशाली ने तत्काल स्पष्टीकरण मांगा
- जवाब नहीं मिलने पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
- शिक्षा विभाग में मामले को लेकर बढ़ी हलचल
हाजीपुर/वैशाली: वैशाली जिले के एक सरकारी विद्यालय से शिक्षा विभाग को हिलाकर रख देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला शिक्षिका ने अपने ही विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक पर मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार, क्षेत्रीय भेदभाव और प्रशासनिक अनियमितता जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) वैशाली ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित प्रभारी प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण तलब किया है। शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
मानसिक प्रताड़ना और अपमान का आरोप
मामला राजकीय मध्य विद्यालय, चितनामीपुर, वैशाली का बताया जा रहा है, जहां BPSC TRE-02 से नियुक्त शिक्षिका आकांक्षा राय ने लिखित शिकायत देकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा उन्हें “बाहरी” और “गैर” जैसे शब्दों से संबोधित कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। विरोध करने पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया गया है।
DEO ने मांगा जवाब, कार्रवाई की चेतावनी
शिकायत में यह भी कहा गया है कि शिक्षिका पर अन्य शिक्षकों के कार्यों का अतिरिक्त बोझ डाला जाता था और ई-शिक्षाकोष ऐप में उपस्थिति दर्ज करने से भी रोका गया।
महिला शिक्षिका ने अपने आवेदन में यह तक कहा है कि लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना के कारण उन्हें आत्मघाती कदम उठाने तक का भय सताने लगा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी वैशाली ने संबंधित प्रभारी प्रधानाध्यापक को पत्र जारी कर तत्काल स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। पत्र में साफ कहा गया है कि यदि समय पर जवाब नहीं दिया गया तो आरोपों को सत्य मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन और कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग में बढ़ी हलचल:
DEO कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि एक लोक सेवक और संस्था प्रधान होने के नाते इस प्रकार का व्यवहार अत्यंत निंदनीय है। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
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