भीड़ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनआक्रोश भाकपा(माले)–इंसाफ मंच का राज्यव्यापी प्रतिवाद

भीड़ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनआक्रोश भाकपा(माले)–इंसाफ मंच का राज्यव्यापी प्रतिवाद
  • नवादा लिंचिंग कांड के विरोध में दरभंगा में मार्च व सभा
  • दोषियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को न्याय व मुआवज़े की मांग
  • बुलडोज़र कार्रवाई व भीड़तंत्र पर रोक की उठी आवाज़

RxTv BHARAT, ब्यूरो दरभंगा – नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र अंतर्गत भट्टा गांव में 5 दिसंबर 2025 को मुस्लिम कपड़ा फेरीवाले मोहम्मद अतहर हुसैन की बर्बर मॉब लिंचिंग के खिलाफ मंगलवार को दरभंगा में भाकपा(माले) और इंसाफ मंच के बैनर तले राज्यव्यापी प्रतिवाद के तहत विरोध मार्च आयोजित किया गया। लहेरियासराय टावर पर हुई सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और भीड़ हिंसा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की।

भीड़ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनआक्रोश भाकपा(माले)–इंसाफ मंच का राज्यव्यापी प्रतिवाद

सभा को इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, भाकपा(माले) के राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार, अशोक पासवान, मोहम्मद जमालुद्दीन, पप्पू खान, हरि पासवान, रंजन प्रसाद सिंह, हसीना खातून, मोहम्मद शौकत सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन भाकपा(माले) के महानगर सचिव कामेश्वर पासवान ने किया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मोहम्मद अतहर हुसैन की हत्या में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी कर कड़ी सज़ा दी जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्याय और पर्याप्त मुआवज़ा मिले, झूठे मुकदमे रद्द हों तथा दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही बुलडोज़र कार्रवाई और भीड़तंत्र पर तत्काल रोक लगाने तथा गृह मंत्री सम्राट चौधरी से राज्य की कानून-व्यवस्था पर सार्वजनिक जवाब देने की मांग की गई।

वक्ताओं ने कहा कि यह घटना बिहार में कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है और राज्य में बनाए जा रहे सांप्रदायिक माहौल का खतरनाक संकेत है। आरोप लगाया गया कि गृह मंत्री सम्राट चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद मॉब हिंसा और बुलडोज़र कार्रवाई की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। यदि बिहार में ‘योगी मॉडल’ लागू करने की कोशिश की गई तो यह सामाजिक एकता और लोकतंत्र के लिए घातक होगा, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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सभा में बताया गया कि मोहम्मद अतहर हुसैन को केवल मुस्लिम होने के संदेह में घेरकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। उन्हें बेरहमी से पीटा गया, गर्म औज़ार से दागा गया, कान काटे गए, उंगली तोड़ी गई और उनके निजी अंगों में पेट्रोल डाला गया। अधमरी हालत में छोड़ दिए जाने के बाद उल्टे उन पर चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। इलाज के दौरान 12 दिसंबर 2025 को उनकी मौत हो गई। इस मौत के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और चिकित्सकीय लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया गया।

घटना के बाद भट्टा गांव और आसपास के इलाकों में भय का माहौल है। गांव में रह रहे 10–15 मुस्लिम परिवार डरे-सहमे हैं और खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं हैं। आरोप है कि अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है और उनकी पृष्ठभूमि की गंभीर जांच अब तक नहीं की गई है।

भाकपा(माले) और इंसाफ मंच ने बिहार की जनता से संविधान, लोकतंत्र और इंसाफ की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। मंच से यह संकल्प दोहराया गया कि भीड़तंत्र, नफरत और दमन की राजनीति के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और बिहार को सांप्रदायिक हिंसा की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा।

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