दरभंगा में बाल विवाह के खिलाफ मजबूत पहल

- जिला व प्रखंड स्तर पर बाल विवाह रोकथाम को लेकर बैठक
- स्कूल ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने पर जोर
- बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय व मजबूत करने की अपील
दरभंगा जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी चांदनी सिंह की अध्यक्षता में दरभंगा लहेरियासराय स्थित प्रेक्षा गृह ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) श्रीमती चांदनी सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीपीओ चांदनी सिंह ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए समाज में निरंतर जन-जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से आठवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को बाल विवाह का सबसे अधिक शिकार बताया और ऐसे बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया। साथ ही अभिभावकों को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और कानूनी नुकसान की जानकारी देने की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार तथा सेंटर डायरेक्ट कवच 2.0 परियोजना के समन्वयकों ने बिहार सरकार की बाल संरक्षण समितियों को नियमित और अधिक मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम में सेंटर डायरेक्ट से ममता कुमारी, प्रियंका कुमारी, सदर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अंजना कुमारी सहित सदर क्षेत्र की लगभग 160 आंगनबाड़ी सेविकाओं ने बाल विवाह मुक्त समाज की शपथ ली।
वहीं कवच परियोजना 2.0 के तहत हायाघाट प्रखंड मुख्यालय में 100 दिवसीय बाल विवाह निषेध अभियान एवं प्रखंड स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सीडीपीओ मोनिका रानी ने की। इसमें सभी आशा पर्यवेक्षिका, सेविका, विधिक सेवा प्राधिकार से पीएलवी तथा सेंटर डायरेक्ट एनजीओ के प्रखंड समन्वयक संतोष कुमार और पूनम कुमारी मौजूद रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पंचायत स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर बाल विवाह व बाल श्रम के खतरे में आने वाले बच्चों की पहचान की जाएगी। ऐसे सभी मामलों की रिपोर्ट प्रखंड स्तर पर साझा कर जिला स्तरीय स्टेकहोल्डरों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि बच्चों को पुनः विद्यालय भेजकर उन्हें सुरक्षित भविष्य प्रदान किया जा सके।
जिला समन्वयक रामविनय कुमार ने बताया कि कवच 2.0 परियोजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाल विवाह और बाल श्रम से बचाकर शिक्षा और संरक्षण के दायरे में लाना है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों और समाज की सहभागिता आवश्यक है।
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