प्रमंडल क्षेत्र में शिलान्यास की अनदेखी नाम का शिलान्यास, डिटेल्स बाद में — सिस्टम पर उठे सवाल

प्रमंडल क्षेत्र में शिलान्यास की अनदेखी नाम का शिलान्यास, डिटेल्स बाद में — सिस्टम पर उठे सवाल

  •  प्रमंडल क्षेत्र में शिलान्यास की अनदेखी
  • नाम का शिलान्यास, डिटेल्स बाद में — सिस्टम पर उठे सवाल

🔹 शिलान्यास के दिन अधूरी पट्ट, जरूरी जानकारी गायब

🔹 अगले दिन या बाद में जोड़ी जाती है योजना व राशि की डिटेल्स

🔹 प्रमंडल क्षेत्र में फैली लापरवाही पर अब गंभीर सवाल


RxTv BHARAT : दरभंगा नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों के शिलान्यास को लेकर सामने आ रही प्रक्रिया अब केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रह गई है,बल्कि यह पूरे प्रमंडल क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।
सड़कों, नालों और अन्य नगर निगम कार्यों के शिलान्यास के दौरान पहले दिन केवल नाम मात्र की शिलान्यास पट्ट लगाई जा रही है, जबकि कार्य से जुड़ी आवश्यक जानकारियां गायब रहती हैं।

प्रमंडल क्षेत्र में शिलान्यास की अनदेखी नाम का शिलान्यास, डिटेल्स बाद में — सिस्टम पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों के अनुसार शिलान्यास के समय पट्ट पर न योजना का पूरा नाम होता है,न स्वीकृत राशि,न वित्तीय वर्ष, न विभागीय आदेश संख्या और न ही कार्य अवधि का उल्लेख।
इसके बाद अगले दिन या कुछ समय बाद दूसरी पट्ट लाकर पूरी जानकारी जोड़ दी जाती है।

प्रोटोकॉल की दृष्टि से, नगर निगम के किसी भी विकास कार्य का शिलान्यास तभी किया जाता है जब उसकी प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति पहले ही पूरी हो चुकी हो।
शिलान्यास का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि जनता के सामने उस कार्य से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करना होता है।
ऐसे में केवल नाम लिखकर शिलान्यास करना
प्रोटोकॉल की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता।

यदि यह स्थिति किसी एक स्थान या एक कार्य तक सीमित होती, तो इसे तकनीकी चूक कहा जा सकता था। लेकिन प्रमंडल क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाया जाना यह संकेत देता है कि
यह एक सिस्टमेटिक लापरवाही बन चुकी है।

तस्वीरों में मेयर, उपमेयर और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी भी देखी जा रही है।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अधूरी जानकारी पर किसी का ध्यान नहीं गया, या फिर यह प्रक्रिया अब पूरी व्यवस्था में सामान्य मान ली गई है।

अब इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आ रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि क्या यह महज लापरवाही है, या फिर इंजीनियर, संवेदक और स्थानीय प्रतिनिधियों के स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका को नजरअंदाज किया जा रहा है।
हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बार-बार एक जैसी प्रक्रिया अपनाया जाना निष्पक्ष जांच की मांग जरूर करता है।

जनता का यह भी कहना है कि यदि सभी कार्य नियम और प्रोटोकॉल के अनुसार हो रहे हैं, तो नगर निगम और संबंधित प्रशासन को स्वयं आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की भ्रांति या संदेह न रहे।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों का मानना है कि यह मामला केवल शिलान्यास पट्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के सूचना के अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। इसी कारण इस पूरे विषय को प्रमंडल आयुक्त के संज्ञान में लाना आवश्यक बताया जा रहा है, ताकि प्रमंडल स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी और नगर निगम की कार्यशैली की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।

अब बड़ा सवाल यही है —
क्या शिलान्यास केवल नाम लगाने की रस्म बनकर रह गया है?
क्या जानकारी बाद में जोड़ना प्रोटोकॉल की आत्मा के अनुरूप है?
या फिर प्रमंडल क्षेत्र में यह लापरवाही एक स्थायी व्यवस्था का रूप ले चुकी है?

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