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दरभंगा नगर निगम में दुकानों के आवंटन पर उठे सवाल, पार्षदों ने डीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
🖋️ रिपोर्ट: जॉर्नलिस्ट रोहित | दरभंगा ब्यूरो | RxTv BHARAT
📌 मुख्य बातें
- वी-के रोड स्थित दुकानों के आवंटन में अनियमितता का आरोप।
- वार्ड पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने डीएम को सौंपा ज्ञापन।
- उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग हुई तेज।
- कई पार्षदों और उपमहापौर ने भी जांच की मांग का समर्थन किया।
- दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
दरभंगा नगर निगम में वी-के रोड स्थित दुकानों के आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वार्ड संख्या-44 के पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने जिलाधिकारी दरभंगा को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और कई महत्वपूर्ण नियमों की अनदेखी की गई है।

पहले भी उठ चुकी है जांच की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि इस मामले को लेकर पहले भी जिला प्रशासन और प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होती तो इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने नहीं आतीं।
चयन प्रक्रिया और दस्तावेजों की होगी जांच?
पार्षदों ने मांग की है कि आवंटन प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज, चयन सूची, पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया तथा वित्तीय पहलुओं की गहन जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

कई जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थन
इस मौके पर नगर निगम की उपमहापौर नजिया हसन, वार्ड संख्या-27 के पार्षद गंगा मंडल, वार्ड संख्या-45 के पार्षद देव कृष्ण झा, वार्ड संख्या-23 की पार्षद चांदनी देवी, वार्ड संख्या-31 के पार्षद नफीसुल हक रिंकू तथा वार्ड संख्या-11 की पार्षद सोनी पूर्वे भी मौजूद रहीं।
सभी जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में दुकानों के आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।
“कार्रवाई नहीं हुई तो मामला पटना तक जाएगा”
वार्ड पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने कहा कि नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन से संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिलती है तो वे इस मामले को प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर पटना जाकर संबंधित विभागों एवं उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे।

“यह मामला आम लोगों के अधिकार और नगर निगम की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”
अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
नगर निगम में दुकानों के आवंटन को लेकर उठे इस विवाद ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अब नगरवासियों की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच शुरू होती है तो पूरे आवंटन प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
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