क्या करोड़ों की योजना का पैसा डकार गये अफसर? सरायकेला के कई गावों को नहीं मिल रहा पीने का पानी

क्या करोड़ों की योजना का पैसा डकार गये अफसर? सरायकेला के कई गावों को नहीं मिल रहा पीने का पानी

Jal Jeevan Mission Jharkhand, सरायकेला, (शचिंद्र कुमार दाश): सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड की टेंटोपोसी ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ अब तक ग्रामीणों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है. कागजों में योजना को कंप्लीट बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लक्ष्य के 50 प्रतिशत घरों तक भी नल से जल नहीं पहुंच पा रहा है. गर्मी की दस्तक के साथ ही इलाके में पेयजल संकट गहराने लगा है और ग्रामीणों को शुद्ध पानी के लिए जूझना पड़ रहा है.

कई गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा पानी

ग्रामीणों के अनुसार विजय, सिंधुकोपा और जामडीह जैसे गांवों के कई घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंच पाया है. वहीं, बेगनाडीह, उजानपुर, डूबराजपुर, गुड़ा, रांगाटांड, रामचंद्रपुर, झापुड़ागोडा और गोईरा समेत कई गांवों में कभी-कभार ही पानी की आपूर्ति होती है. वह भी इतनी कम मात्रा में कि लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं.

डेढ़ हजार घरों तक पानी पहुंचाने का था लक्ष्य

इस योजना के तहत करीब एक दर्जन गांवों के डेढ़ हजार से अधिक घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था. इसके लिए हिदीबिली गांव के पास स्थित खरकई नदी के तट पर पंप हाउस बनाया गया. यहां से पानी को हलुदबनी गांव के पास बने जल मीनार में चढ़ाकर पाइपलाइन के जरिये सप्लाई करने की योजना बनाई गयी थी. हालांकि वर्ष 2022-23 से कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति शुरू की गयी, लेकिन अब भी आधे से अधिक गांवों तक पानी नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहा है.

तकनीकी खामियों से प्रभावित योजना

करीब 8 लाख लीटर क्षमता वाली पानी टंकी बनने के बावजूद पाइपलाइन बिछाने में हुई गड़बड़ियों और तकनीकी खामियों के कारण कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि पाइपलाइन बिछाने का काम आधा-अधूरा किया गया है. उनका कहना है कि कहीं पाइप ही नहीं बिछाया गया है तो कहीं नल नहीं लगाया गया है. कुछ गांवों में पाइपलाइन होने के बावजूद पानी का प्रेशर इतना कम है कि एक बाल्टी भरने में भी घंटों लग जाते हैं.

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गर्मी बढ़ते ही बढ़ी परेशानी

गर्मी शुरू होते ही कई गांव में पेयजल संकट गहराने लगा है. ग्रामीण फिलहाल चापाकल, कुएं, निजी डीप बोरिंग और छोटे-छोटे सोलर से संचालित जल मीनारों के सहारे अपनी प्यास बुझा रहे हैं. सुबह के समय इन जल स्रोतों पर पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ देखी जा सकती है. ग्रामीणों की मांग है कि जलापूर्ति योजना को जल्द दुरुस्त कर नियमित पानी उपलब्ध कराया जाये.

विधानसभा में उठा मामला

इस योजना की बदहाली का मुद्दा बुधवार को झारखंड विधानसभा में भी उठा. दशरथ गागराई ने शून्यकाल के दौरान सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के तहत बनाई गयी टेंटोपोसी ग्रामीण जलापूर्ति योजना को कागजों में कंप्लीट दिखाकर राशि की निकासी कर ली गयी है, जबकि धरातल पर कई अनियमितताएं हैं. उन्होंने सरकार से मांग की है कि योजना की खामियों को जल्द दूर कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाये.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस मामले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता ललित इंदवार ने बताया कि अभी कुछ गांवों में पाइपलाइन बिछाने का काम बाकी है. इसी कारण सभी गांवों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. उन्होंने कहा कि विभाग का फोकस जल्द पाइपलाइन का काम पूरा करने पर है, जिसके बाद सभी चयनित गांवों में शुद्ध पानी की सप्लाई शुरू हो जायेगी.

ग्रामीणों की राय

बेगनाडीह की कविता महतो का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने में तकनीकी पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है. सिंधुकोपा के कृष्णा महतो ने बताया कि उनके गांव में अब तक नल से पानी नहीं पहुंच पाया है, जिससे लोगों को रोजाना शुद्ध पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है.

ग्रामीणों की राय

वहीं, बेगनाडीह के जगत महतो ने कहा कि योजना की तकनीकी खामियों को दूर कर जल्द सभी घरों तक नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए. ग्रामीण रामु त्रिपाठी के अनुसार कई जगह पाइप या नल नहीं लगाये गये हैं और जहां पानी आता भी है, वहां प्रेशर इतना कम है कि एक बाल्टी भरने में घंटों लग जाते हैं.

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