लोक अदालत में बिहार का बड़ा आंकड़ा 38 जिलों में एक दिन में हजारों मामलों का अनुमानित निपटारा

लोक अदालत में बिहार का बड़ा आंकड़ा 38 जिलों में एक दिन में हजारों मामलों का अनुमानित निपटारा
  • राष्ट्रीय लोक अदालत में बिहारभर में रिकॉर्ड समाधान का आकलन
  • कई करोड़ रुपये की समझौता राशि का अनुमान
  • प्री-लिटिगेशन और लंबित मामलों पर खास फोकस

RxTv BHARAT, पटना – बिहार के सभी 38 जिलों में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर सामने आए आंकड़े बेहद प्रभावशाली माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक आकलन के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि एक ही दिन में राज्यभर में दस हजार से अधिक मामलों का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से किया गया।

अनुमान के अनुसार अधिकांश जिलों में प्री-लिटिगेशन मामलों का अनुपात ज्यादा रहा, जिससे न्यायालयों पर लंबित मामलों के बोझ को काफी हद तक कम करने में मदद मिली। पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पूर्णिया, समस्तीपुर, बेगूसराय, छपरा, सीवान, गोपालगंज, मधुबनी, सीतामढ़ी, वैशाली, नालंदा, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, नवादा, जमुई, बांका, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया, लखीसराय, शेखपुरा, मुंगेर और वैशाली समेत सभी जिलों में लोक अदालत की सक्रियता देखने को मिली।

आकलन यह भी दर्शाता है कि राज्यभर में कई करोड़ रुपये की समझौता राशि तय की गई, जिससे आम वादकारियों को सीधे आर्थिक राहत मिली। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), आपराधिक सुलह योग्य मामले, बिजली-पानी बिल विवाद, बैंक रिकवरी, भूमि और पारिवारिक विवाद जैसे प्रकरण लोक अदालत के मुख्य केंद्र में रहे।

कई जिलों में बिजली एवं जल कर से जुड़े सैकड़ों मामलों का निपटारा हुआ, वहीं आपराधिक सुलह योग्य मामलों में भी बड़ी संख्या में समझौते हुए। लोक अदालत की प्रक्रिया ने यह साबित किया कि आपसी सहमति से विवाद सुलझाना न केवल तेज है, बल्कि समाज में सौहार्द और भरोसे को भी मजबूत करता है।

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लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मामलों का निपटारा बिना कोर्ट फीस के हुआ और समझौते के बाद कोर्ट फीस की वापसी का लाभ भी मिला। अंतिम और बाध्यकारी फैसलों ने पक्षकारों को लंबे मुकदमों से राहत दी और न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित की।

न्यायपालिका, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, बार एसोसिएशन और विधिक सेवा प्राधिकारों के समन्वय से लोक अदालत व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। बिहार के 38 जिलों में सामने आया यह अनुमानित आंकड़ा लोक अदालत को न्याय का सशक्त और प्रभावी मंच साबित करता है।

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