फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार व मुशायरा का भव्य आयोजन

फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार व मुशायरा का भव्य आयोजन
उर्दू भाषा की तहज़ीब, शायरी और साझा विरासत का उत्सव
- उर्दू निदेशालय व जिला प्रशासन दरभंगा के तत्वावधान में आयोजन
- जिलाधिकारी कौशल कुमार ने उर्दू प्रेमियों का किया अभिनंदन
- मुशायरे में शायरों की भावपूर्ण व सराही गई प्रस्तुतियां
RxTv BHARAT, ब्यूरो दरभंगा —
प्रेक्षागृह दरभंगा में उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय पटना तथा जिला प्रशासन दरभंगा के तत्वावधान में फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार, जिला स्तरीय कार्यशाला एवं मुशायरे का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी दरभंगा श्री कौशल कुमार, उप विकास आयुक्त श्री स्वप्निल, प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू कोषांग श्री आनंद कुमार, प्रो. मुश्ताक अहमद (प्राचार्य, सीएम कॉलेज दरभंगा), प्रो. फ़ैज़ अहमद (मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, दरभंगा) तथा डॉ. मंजर सुलेमान द्वारा संयुक्त रूप से शमा रौशन कर किया गया।
कार्यक्रम के दौरान जिला उर्दू नामा का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री कौशल कुमार ने उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यशाला-सह-मुशायरा कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाले सभी उर्दू प्रेमियों का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उर्दू भाषा की उस जीवंत परंपरा का उत्सव है, जो प्रेम, सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों की मिठास में पिरोती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि उर्दू बिहार सरकार की द्वितीय राज्यभाषा होने के साथ-साथ हमारी साझा तहज़ीब की मधुर अभिव्यक्ति भी है। इसकी भाषा में शालीनता, लहजे में मिठास और भावों में अपनापन है, जिसने सदियों से लोगों के दिलों को जोड़े रखा है। उर्दू भाषा के विकास एवं संरक्षण के लिए बिहार सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है और जिला उर्दू भाषा कोषांग के माध्यम से प्रत्येक जिले में इसके उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दरभंगा जिला ऐतिहासिक रूप से उर्दू अदब, शायरी और तहज़ीब का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां उर्दू से प्रेम करने वालों की बड़ी संख्या है, जो इस भाषा को केवल बोलते ही नहीं, बल्कि अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। उर्दू भाषा की मिठास, लोकप्रियता और व्यापक स्वीकार्यता को प्रसिद्ध शायर दाग़ देहलवी के शेरों के माध्यम से उन्होंने अत्यंत सुंदर ढंग से रेखांकित किया।
मुशायरे के दौरान शायर मो. निज़ाम बख़्श द्वारा प्रस्तुत अशआर ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने पढ़ा —
“ज़िन्दगी के आएने को तोड़कर देखा मगर
अक्स मेरा खो गया जाने कहां जाने किधर।”
उनकी इस प्रस्तुति को सभागार में मौजूद श्रोताओं ने खूब सराहा।
जिलाधिकारी ने उपस्थित उर्दू शिक्षकों, विद्वानों एवं कवियों का हृदय से अभिनंदन करते हुए आशा व्यक्त की कि यह आयोजन उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार एवं विकास की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायक कदम सिद्ध होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि जो लोग उर्दू भाषा में अभिरुचि रखते हैं, वे इसे आगे बढ़ाने का कार्य करें।
कार्यक्रम में उर्दू के विशिष्ट विद्वानों, उर्दू डेलिगेट्स, अन्य भाषाविदों के व्याख्यान के साथ-साथ छात्र-छात्राओं द्वारा भी सराहनीय प्रस्तुतियां दी गईं। पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ. मो. जसीमुद्दीन, उर्दू अनुवादक, जिला उर्दू भाषा कोषांग दरभंगा द्वारा किया गया।
दरभंगा, फ़रोगे-ए-उर्दू, उर्दू सेमिनार, उर्दू मुशायरा, मो. निज़ाम बख़्श, उर्दू शायरी, जिला प्रशासन दरभंगा, उर्दू निदेशालय
#Darbhanga #FaroghEUrdu #UrduMushaira #UrduPoetry #MohNizamBakhsh #BiharNews #RxTvBharat


