पश्चिमी सिंहभूम के मस्जिदों में अदा की गयी रमजान के पहले जुमे की नमाज, खुदा के द्वार पर झुके हजारों सिर

पश्चिमी सिंहभूम के मस्जिदों में अदा की गयी रमजान के पहले जुमे की नमाज, खुदा के द्वार पर झुके हजारों सिर

West Singhbhum Ramadan, चक्रधरपुर: पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर शहर सहित आसपास के इलाकों की 16 मस्जिदों और नमाजगाहों में शुक्रवार को रमजान का पहला जुमा बड़ी श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के साथ अदा किया गया. इस मौके पर मस्जिदों और नमाजगाहों में रोजेदारों की भारी उपस्थिति रही. नमाजियों ने जुमा की नमाज अदा कर अल्लाह से रहमत, बरकत, तौबा और गुनाहों की माफी की दुआएं मांगीं. रमजान का महीना इबादत, रोजा, याद-ए-खुदा और आत्म-संयम का महीना माना जाता है. ऐसे में जब इस मुकद्दस महीने का पहला जुमा आता है तो उसकी फजीलत और भी बढ़ जाती है.

जुमा की फजीलत और महत्ता

इस्लाम में जुमा को हफ्ते का सबसे पवित्र दिन माना गया है. पांचों फर्ज नमाजों में जुमा की नमाज़ विशेष महत्व रखती है, जो ज़ुहर के समय मस्जिदों में सामूहिक रूप से अदा की जाती है. कुरआन में अल्लाह का फरमान है- “हे ईमान वालो! जब जुमा की अजान दी जाए तो खुदा की याद के लिए जल्दी चलो और व्यापार-व्यवसाय छोड़ दो, यह तुम्हारे लिए बेहतर है यदि तुम समझो”. हदीस में वर्णित है कि पैग़म्बर मुहम्मद (स.) ने फरमाया-“जिसने जुमा की नमाज़ ईमान और सवाब की नियत से अदा की, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, बशर्ते उसने कोई बड़ा गुनाह न किया हो.” जुमा केवल नमाज़ नहीं, बल्कि एकता, भाईचारे और सामुदायिक सद्भाव का प्रतीक भी है. मुसलमान एक साथ इकट्ठा होकर इबादत करते हैं, कुरआन की तिलावत सुनते हैं और आपसी भलाई व नेक सलाह का आदान-प्रदान करते हैं.

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रमजान में जुमा का बढ़ा महत्व

रमजान स्वयं में रहमतों और बरकतों का महीना है. इस दौरान रोज़ा रखना, तरावीह पढ़ना, दुआ करना और नेक कार्य करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है. ऐसे पवित्र महीने में अदा की गयी जुमा की नमाज़ का सवाब कई गुना बढ़ जाता है.

मस्जिदों में माह-ए-रमजान की रौनक

चक्रधरपुर की मस्जिदों और नमाज़गाहों में शुक्रवार सुबह से ही नमाज़ियों का तांता लगा रहा. रोजेदारों ने सहरी से ही इबादत की शुरुआत की और दोपहर में जुमा के वक्त अल्लाह से रहमत, तरक्की, सुख-चैन और देश-दुनिया की अमन-शांति के लिए दुआएं मांगीं. मौलानाओं और इमामों ने अपने बयान में कहा कि रमजान सब्र, दया और नेक नियत का महीना है. पहले जुमा की नमाज़ आत्म-सुधार, आध्यात्मिक जागृति और नई ऊर्जा का संदेश देती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पवित्र महीने का पूरा लाभ उठाएं और रोज़ा, नमाज़ तथा दुआओं के जरिए अल्लाह के करीब होने का प्रयास करें.

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