डॉ. अरविन्द कुमार मिलन की पुस्तक का विमोचन, भाषा को बताया शिक्षा की आत्मा

डॉ. अरविन्द कुमार मिलन की पुस्तक का विमोचन, भाषा को बताया शिक्षा की आत्मा

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दरभंगा | 11 जून 2026

डॉ. अरविन्द कुमार मिलन की पुस्तक ‘पाठ्यचर्या में भाषा : एक परिचय’ का कुलपति ने किया विमोचन

भाषा विचारों के आदान-प्रदान का सबसे प्रभावी माध्यम, शिक्षा की आत्मा है भाषा : कुलपति

मुख्य बातें

  • एलएनएमयू के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने दो पुस्तकों का किया विमोचन।
  • हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुई पुस्तकें।
  • शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताई गईं पुस्तकें।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत संचालित शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार मिलन द्वारा लिखित दो पुस्तकों— ‘पाठ्यचर्या में भाषा : एक परिचय’ तथा ‘An Introduction to Language across the Curriculum’ का विमोचन किया।

डॉ. अरविन्द कुमार मिलन की पुस्तक का विमोचन, भाषा को बताया शिक्षा की आत्मा

विमोचन समारोह कुलपति के आवासीय कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ प्रोफेसर, शिक्षाविद एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कुलपति ने कहा कि भाषा सीखने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिसके बिना विचारों का आदान-प्रदान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भाषा पाठ्यचर्या की आत्मा है और इसके विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

छात्रों और शिक्षकों के लिए उपयोगी होंगी पुस्तकें

कुलपति ने डॉ. मिलन को बधाई देते हुए कहा कि ये पुस्तकें न केवल छात्र-छात्राओं बल्कि शिक्षकों और सामान्य पाठकों को भी शिक्षा के क्षेत्र में नया दृष्टिकोण प्रदान करेंगी।

बी.एड. विभाग में आयोजित दूसरे विमोचन कार्यक्रम में डीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि पुस्तकें शिक्षाशास्त्र के साथ-साथ स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होंगी।

भाषा शिक्षा का आधार

विश्वविद्यालय शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. मो. अफाक हाशमी ने कहा कि बी.एड. पाठ्यक्रम में भाषा एक महत्वपूर्ण विषय है और ये पुस्तकें छात्रों के लिए काफी सहायक सिद्ध होंगी। वहीं संस्कृत प्राध्यापक डॉ. आर.एन. चौरसिया ने कहा कि भाषा चिंतन प्रक्रिया का आधार है तथा भाषा में कमजोरी होने पर छात्र अन्य विषयों में भी पीछे रह जाते हैं।

डॉ. अरविन्द कुमार मिलन की पुस्तक का विमोचन, भाषा को बताया शिक्षा की आत्मा

लेखक डॉ. अरविन्द कुमार मिलन ने बताया कि दोनों पुस्तकों में कुल 10 अध्याय हैं तथा इन्हें नई दिल्ली के एजुकेशनल पब्लिशिंग हाउस द्वारा वर्ष 2026 में प्रकाशित किया गया है। उन्होंने कहा कि भाषा के समुचित विकास से छात्रों में अभिव्यक्ति, सृजनात्मकता और आलोचनात्मक चिंतन का स्वतः विकास होता है।

विशेष: विशेषज्ञों ने माना कि भाषा शिक्षा केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, रचनात्मकता और ज्ञान के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार है।

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🖋️ रिपोर्ट: जॉर्नलिस्ट रोहित | ब्यूरो दरभंगा |
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